पहली गोली फिल्म में नहीं, सिस्टम के सीने में चलती है। जहां कानून किताबों में रहता है और फैसले बंद कमरों में होते हैं। और यहीं से शुरू होती है वो कहानी… जो सिर्फ सिनेमा नहीं, सत्ता का असली चेहरा दिखाती है। दुनिया The Godfather को एक क्लासिक कहती है। लेकिन अगर आप ध्यान से देखें, तो ये फिल्म नहीं… एक “मैनुअल ऑफ पावर” है। “फिल्म नहीं, पावर का ब्लूप्रिंट” Francis Ford Coppola ने जब इस कहानी को स्क्रीन पर उतारा, तो वो सिर्फ एक गैंगस्टर ड्रामा नहीं बना रहे…
Read MoreTag: Film Review
45 साल का राज खोल गई ‘धुरंधर’! सच देख बोलोगे – प्रोपोगंडा नहीं आईना है
एक फिल्म आई… और देश दो हिस्सों में बंट गया। किसी ने कहा “प्रोपोगंडा”, तो किसी ने कहा “सच्चाई का आईना”। लेकिन असली सवाल ये है — डर फिल्म से है या उसमें दिखाए गए सच से? धुरंधर: फिल्म नहीं, फुल-ऑन बहस मशीन Dhurandhar ने रिलीज होते ही थिएटर से ज्यादा सोशल मीडिया पर धुआं उड़ा दिया। कहानी में एक किरदार जमील जमाली… 45 साल से पाकिस्तान में। “भाई उस समय कौन सी सरकार थी?” फिल्म ने सिर्फ एक दौर नहीं… कई सरकारों को घसीट लिया। हमजा 15 साल पहले…
Read MoreRazia Sultan Review: क्यों फ्लॉप हुई थी 1983 की सबसे महंगी फिल्म?
बॉलीवुड के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो बनते समय साम्राज्य जैसी लगती हैं, लेकिन रिलीज होते ही रेत के महल साबित होती हैं. 1983 में आई फिल्म Raziyya Sultan भी कुछ ऐसी ही कहानी है. भव्य सेट, शायरी से भरे संवाद और बड़े सितारे होने के बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर टिक नहीं पाई. लेकिन आज भी इसे हिंदी सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिना जाता है. इतिहास की पहली महिला सुल्तान पर बनी फिल्म फिल्म की कहानी दिल्ली सल्तनत की पहली और इकलौती महिला…
Read Moreजब ‘धुरंधर’ देख पाक Critics बोले – भाई, ऐसी फिल्में हमसे नहीं बनतीं!
Ranveer Singh की फिल्म ‘Dhurandhar’ इन दिनों सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान में भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। फिल्म की कहानी, ट्रीटमेंट और परफॉर्मेंस ने दर्शकों को ऐसा बांधा है कि सोशल मीडिया से लेकर फिल्म क्रिटिक्स तक, हर जगह इसकी तारीफ हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि तारीफ करने वालों में वो लोग भी शामिल हैं, जो आमतौर पर भारतीय फिल्मों को लेकर बेहद सख्त नजरिया रखते हैं। Karachi से Lyari तक, कहानी ने खींचा ध्यान फिल्म का बड़ा हिस्सा कराची के लयारी…
Read Moreगीत मूवी रिव्यू: जब प्यार हुआ, बाँसुरी बजी और कुँवर ने सब कुछ बिगाड़ दिया
रामानंद सागर की “गीत” एक ऐसी फिल्म है जिसमें अगर आपने ध्यान न दिया तो लगता है, “अरे वाह, कितना मीठा संगीत!” लेकिन ध्यान दो, तो एहसास होता है कि संगीत के पीछे एक गहरी साजिश चल रही है। इसमें राजेन्द्र कुमार हैं – एक भोले-भाले चरवाहे बने हुए, माला सिन्हा हैं – मंच पर चमकती अदाकारा, और फिर आते हैं सुजीत कुमार – एक ऐसा कुँवर जो प्यार में बर्बाद नहीं, क्रिमिनल बन जाता है। म्यूजिकल लव स्टोरी जिसमें खून, धोखा और जुर्म भी है कमला, यानी माला सिन्हा,…
Read More