नई दिल्ली: भारत में कृत्रिम ‘सूरज’ यानी परमाणु संलयन से ऊर्जा हासिल करने की दिशा में निजी क्षेत्र ने अहम कदम बढ़ाया है। बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी प्रनोस फ्यूजन ने अपने कॉम्पैक्ट टोकामक रिएक्टर PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा तैयार किया है। 40 सेंटीमीटर व्यास वाले इस टोकामक को कंपनी ने आठ महीने में विकसित किया है। फिलहाल इसका इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए नहीं, बल्कि प्लाज्मा नियंत्रण, परीक्षण और संलयन से जुड़ी तकनीकों के अध्ययन के लिए किया जाएगा। PRAGYA में हर साल करीब 3 हजार प्लाज्मा शॉट का…
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