प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कुछ छात्र आर्थिक तंगी से जूझते हुए खून बेचकर पढ़ाई का खर्च जुटाने को मजबूर हैं। महंगी कोचिंग, हॉस्टल, मेस और स्टडी मैटेरियल का खर्च उठाने के लिए कोई छात्र महीने में दो बार तो कोई इससे भी कम अंतराल पर रक्त देने की बात कह रहा है। दैनिक भास्कर की विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में छात्रों की इस मजबूरी के साथ ब्लड बैंक के आसपास सक्रिय कथित दलालों के नेटवर्क का भी खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले कई छात्र अपने खर्च के लिए घर पर निर्भर नहीं रहना चाहते। कुछ छात्रों के पिता किसान हैं और खेती से होने वाली आमदनी परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए ही मुश्किल से पर्याप्त है। ऐसे में बच्चों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए दूसरे रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं। दैनिक भास्कर की अंडरकवर टीम ने प्रयागराज में छात्रों से बातचीत कर उनकी परेशानियों और रक्त की खरीद-बिक्री से जुड़े कथित नेटवर्क की पड़ताल की।
दो महीने से हॉस्टल की फीस नहीं दे पाया, इसलिए खून बेचने पहुंचा छात्र
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज के राजापुर चौराहे स्थित इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन (AMA) ब्लड बैंक के बाहर एक छात्र ने बताया कि वह एसएससी की तैयारी कर रहा है। उसके पिता किसान हैं और मां का निधन हो चुका है। परिवार में दो छोटी बहनें भी हैं, जो गांव में रहकर पढ़ाई करती हैं और घर संभालती हैं।
छात्र ने बताया कि खेती से होने वाली आमदनी से परिवार का गुजारा मुश्किल से चलता है। वह पिछले दो महीने से हॉस्टल की फीस नहीं दे पाया था। रहने की जगह छूटने और पढ़ाई बाधित होने के डर से वह पैसे जुटाने के लिए ब्लड बैंक पहुंचा।
रिपोर्टर से बातचीत में छात्र ने एक यूनिट रक्त देने के बदले आठ हजार रुपये की मांग की। उसने बताया कि घर से मिलने वाली रकम कोचिंग और दूसरे खर्चों के लिए पर्याप्त नहीं है। जब उससे पूछा गया कि वह ट्यूशन पढ़ाकर पैसे क्यों नहीं कमाता, तो उसने कहा कि खून दोबारा बन जाएगा, लेकिन पढ़ाई छूट गई तो बेरोजगार रह जाएगा। छात्र के मुताबिक, आर्थिक जरूरत के सामने उसे अपनी परेशानी नजरअंदाज करनी पड़ रही है।
10 दिन में दोबारा खून देने पहुंचा एसएससी की तैयारी करने वाला छात्र
जांच के दौरान आनंद नाम के एक अन्य छात्र से भी बातचीत हुई, जो एसएससी की तैयारी कर रहा था। उसने बताया कि वह पहले कोचिंग की फीस चुकाने के लिए रक्त दे चुका है और अब मेस का बकाया चुकाने के लिए पैसे जुटाना चाहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आनंद ने बताया कि वह करीब 10 दिन पहले दूसरे ब्लड बैंक में भी रक्त दे चुका था। इसके बावजूद वह दोबारा रक्त देने के लिए तैयार था। उसने रिपोर्टर से आठ हजार रुपये मांगे और कहा कि पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उसे यह कदम उठाना पड़ रहा है।
जब उससे इतने कम अंतराल में दोबारा रक्त देने से होने वाली परेशानी के बारे में पूछा गया, तो उसने कहा कि पढ़ाई जारी रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है। छात्र ने यह भी बताया कि कुछ लोग पहले रक्त देकर स्लिप लेते हैं और बाद में मरीज की मांग से जुड़े दस्तावेज दिखाकर रक्त प्राप्त करते हैं।
नीट की तैयारी कर रहे छात्र ने गिरवी रखी जमीन का किया जिक्र
दैनिक भास्कर की पड़ताल में विवेक नाम का एक छात्र भी मिला, जो नीट की तैयारी कर रहा था। उसने बताया कि उसे प्रयागराज भेजकर पढ़ाने के लिए उसके पिता ने दो बीघा खेत गिरवी रख दिया है। परिवार कर्ज में है और उसका नीट का पिछला प्रयास सफल नहीं हुआ। अब उसके पास एक और मौका बचा है।
छात्र के मुताबिक, दिवाली से पहले कोचिंग की फीस जमा करनी थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह आसानी से पैसे भेज सके। इसलिए उसने रक्त देकर रकम जुटाने का फैसला किया। उसने बताया कि एजेंट के जरिए रक्त देने पर पैसे का कुछ हिस्सा कट जाता है, जबकि सीधे सौदा करने पर अधिक रकम मिलने की उम्मीद रहती है।
रिपोर्ट में आशीष नाम के एक अन्य नीट अभ्यर्थी का भी जिक्र है। उसने बताया कि बाहर से प्रयागराज आकर पढ़ाई करने वाले कई छात्र आर्थिक तंगी के कारण इसी तरह पैसों का इंतजाम करते हैं। परिवार पहले ही पढ़ाई के लिए काफी खर्च कर चुका होता है, इसलिए छात्र अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए बार-बार घर से पैसे मांगने में संकोच करते हैं।
कोचिंग और हॉस्टल का खर्च उठाना मुश्किल
छात्रों ने दैनिक भास्कर की टीम को बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों की फीस काफी अधिक है। रिपोर्ट में आकाश इंस्टीट्यूट, एलन करियर और नारायणा जैसे संस्थानों की सालाना फीस करीब 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपये तक बताई गई है।
इसके अलावा हॉस्टल के कमरे का किराया, मेस का खर्च और पढ़ाई की सामग्री खरीदने पर भी रकम खर्च होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, हॉस्टल के कमरे का किराया करीब 3,500 से 5,000 रुपये तक हो सकता है। सरकारी अभ्युदय कोचिंग योजना का विकल्प मौजूद है, लेकिन उसमें प्रवेश के लिए निर्धारित मानक हैं, जिन्हें सभी छात्र पूरा नहीं कर पाते।
इन्हीं खर्चों के बीच कुछ छात्र आर्थिक मदद के अभाव में रक्त देकर रकम जुटाने का रास्ता अपना रहे हैं। हालांकि, यह तरीका उनकी सेहत के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
दलालों के नेटवर्क का भी दावा, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
दैनिक भास्कर की विशेष रिपोर्ट में ब्लड बैंक के आसपास सक्रिय कथित दलालों की भूमिका भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, सोनू नाम के एक व्यक्ति ने अंडरकवर रिपोर्टर से दावा किया कि प्रयागराज के अलावा आसपास के जिलों के ब्लड बैंकों में भी उसका संपर्क है।
रिपोर्टर ने जब एक यूनिट रक्त देने के बदले मिलने वाली रकम के बारे में पूछा, तो सोनू ने शुरुआत में चार हजार रुपये देने की बात कही। बातचीत के दौरान वह पांच हजार रुपये देने पर तैयार हुआ, लेकिन उसने प्रोसेसिंग फीस का भुगतान छात्र से ही करने की बात कही।
रिपोर्ट में सोनू और उसके साथी राजेश के हवाले से दावा किया गया है कि वे एक दिन में 12 यूनिट से अधिक रक्त उपलब्ध करा देते हैं। दोनों ने कथित तौर पर अस्पताल की मुहर, डॉक्टर के फर्जी दस्तावेज, पर्चे और डिमांड लेटर उपलब्ध कराने की बात भी कही। उन्होंने यह दावा भी किया कि अलग-अलग ब्लड बैंकों का इस्तेमाल करके छात्रों को पकड़े जाने से बचाया जा सकता है।
ये दावे अंडरकवर रिपोर्टिंग के दौरान हुई बातचीत पर आधारित हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले बिचौलिये रक्त उपलब्ध कराने के बदले अपना हिस्सा लेते हैं।
ब्लड बैंक की प्रोसेसिंग फीस से घट जाती है मिलने वाली रकम
रिपोर्ट के अनुसार, रक्त देने के बदले मिलने वाली रकम में से छात्रों को प्रोसेसिंग फीस भी चुकानी पड़ती है। इसमें करीब 1,500 रुपये की फीस का जिक्र किया गया है। ऐसे में पांच हजार रुपये में रक्त देने के लिए तैयार होने वाले छात्र के पास फीस चुकाने के बाद लगभग 3,500 रुपये ही बचते हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ छात्र अलग-अलग ब्लड बैंकों में जाकर रक्त देने की कोशिश करते हैं, ताकि उनकी पिछली गतिविधियों का पता न चले। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में मरीजों की तलाश कर सीधे सौदेबाजी भी की जाती है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्लड बैंक इस तरह की गतिविधियों में सीधे शामिल होने से इनकार करते हैं, हालांकि संस्थानों के आसपास सक्रिय कथित नेटवर्क की जानकारी होने का सवाल भी उठाया गया है। प्रयागराज प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है।
पैसे लेकर रक्त देना गैरकानूनी, स्वास्थ्य को भी खतरा
रक्तदान स्वैच्छिक होना चाहिए। पैसे लेकर रक्त देने या रक्त की व्यावसायिक खरीद-बिक्री से जुड़ी गतिविधियां कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं। बार-बार रक्त देने से पहले निर्धारित चिकित्सकीय मानकों और दान के बीच जरूरी अंतराल का पालन करना महत्वपूर्ण है।
प्रयागराज में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार ने रिपोर्ट में कहा कि महिला और पुरुष रक्तदाताओं के लिए चिकित्सकीय मानक तय हैं और ब्लड बैंकों को सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना होता है। उन्होंने चेताया कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जानकारी छिपाकर तय मानकों से अधिक बार रक्त देता है, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
यह मामला प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की मुश्किलों के साथ-साथ रक्त की कथित अवैध खरीद-बिक्री और उनकी मजबूरी का फायदा उठाने वाले बिचौलियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
