यूपी के स्कूलों में घटेंगी छुट्टियां, हर 15 दिन में डीएम-कमिश्नर करेंगे पढ़ाई और व्यवस्थाओं की समीक्षा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए स्कूलों में स्थानीय अवकाश कम रखने और उपलब्ध शिक्षण समय का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया गया है। जनगणना और चुनाव जैसे कार्यों से पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और कक्षाओं में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने की तैयारी है।

शिक्षा विभाग की योजनाओं और विद्यालयों में चल रहे कार्यों की निगरानी के लिए मंडलायुक्त और जिलाधिकारी हर 15 दिन में बेसिक तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा करेंगे। इसके लिए 30 बिंदुओं पर आधारित समीक्षा एजेंडा तैयार किया गया है, जिसमें शैक्षणिक गतिविधियों से लेकर निर्माण कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक की प्रगति जांची जाएगी।

सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश

अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्धारित बिंदुओं को समीक्षा बैठकों में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इन बैठकों में यह देखा जाएगा कि शिक्षा विभाग की योजनाएं किस गति से आगे बढ़ रही हैं और विद्यार्थियों को उनका लाभ मिल रहा है या नहीं।

बेसिक शिक्षा विभाग के तहत निपुण भारत मिशन के लक्ष्य, निपुण मॉड्यूल, निपुण तालिका और यू-डायस के आंकड़ों को अद्यतन करने की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा सौरभ कुमार सिंह प्रकरण में शिक्षकों के समायोजन से जुड़े मामलों को भी समीक्षा में शामिल किया गया है।

बाल वाटिका से लेकर पीएम पोषण तक की होगी जांच

समीक्षा के दौरान होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, बाल वाटिका, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और शिक्षक संकुल की बैठकों की उपयोगिता भी परखी जाएगी। समग्र शिक्षा, पीएम श्री और पीएम पोषण योजनाओं के तहत धनराशि खर्च करने की स्थिति तथा स्कूल प्रबंधन समितियों को भुगतान की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी।

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत विद्यालयों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति और अभिभावकों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान की समीक्षा भी एजेंडे का हिस्सा है।

पीएम पोषण योजना के अंतर्गत बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, रसोइयों के मानदेय, कन्वर्जन कास्ट और उपमा-हलवा वितरण की स्थिति जांची जाएगी। इसके साथ ही रसोइया प्रतियोगिता की तैयारियों की भी समीक्षा होगी।

शिक्षकों के वेतन और लंबित भुगतान पर भी नजर

बैठकों में शिक्षकों के चयन, प्रोन्नत वेतनमान, सेवानिवृत्ति से जुड़े देयकों, लंबित एरियर और कैशलेस चिकित्सा योजना की प्रगति पर भी चर्चा होगी। उल्लास योजना के अंतर्गत निरक्षर लोगों की पहचान, उनके प्रशिक्षण और आकलन की स्थिति भी जांची जाएगी।

माध्यमिक विद्यालयों में प्रोजेक्ट अलंकार और उससे जुड़े नए प्रस्तावों की प्रगति की समीक्षा होगी। वहीं, बेसिक शिक्षा में प्रेरणा मॉड्यूल और माध्यमिक शिक्षा में परख मॉड्यूल के इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया जाएगा।

जर्जर भवनों, स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की भी होगी निगरानी

विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी समीक्षा की जाएगी। जर्जर परिषदीय भवनों के अवशेषों की नीलामी और लंबित ध्वस्तीकरण की स्थिति जांची जाएगी। इसके साथ ही स्मार्ट क्लास और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) लैब कितनी सक्रिय हैं, इसका भी आकलन किया जाएगा।

जिलों में लंबित और चल रहे टेंडर, मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण की भौतिक प्रगति तथा राजकीय विद्यालयों में मिनी स्टेडियम की स्थिति की समीक्षा भी की जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नए प्रयोगों और नवाचारों को इंटरनेट मीडिया पर साझा करने पर भी जोर दिया गया है।

इन नियमित समीक्षाओं का उद्देश्य शिक्षा विभाग की योजनाओं की प्रगति पर नजर रखने के साथ विद्यालयों में पढ़ाई और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है। परीक्षाओं से पहले शिक्षण कार्य के लिए उपलब्ध समय का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना भी इस पहल का अहम हिस्सा है।

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