TMC में इस्तीफों की आंधी! एक और राज्यसभा सांसद ने छोड़ा साथ, ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस को गुरुवार को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बाराइक ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही राज्यसभा में टीएमसी की संख्या घटकर 10 सांसद रह जाने की बात कही जा रही है। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं।

जानकारी के अनुसार, राज्यसभा में टीएमसी के कुल 13 सांसद थे। लगातार तीन इस्तीफों के बाद पार्टी की संख्या में कमी आई है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले एक सप्ताह के भीतर तीन और राज्यसभा सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे पार्टी की संसदीय स्थिति पर और असर पड़ सकता है।

लगातार बढ़ रही हैं पार्टी के भीतर चुनौतियां

पश्चिम बंगाल की सत्ता गंवाने के बाद से टीएमसी के भीतर असंतोष और राजनीतिक हलचल की चर्चाएं तेज हैं। लगातार सामने आ रहे इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंताओं को बढ़ा दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि कई नेता अब नए राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं।

सयानी घोष को लेकर भी तेज हुई अटकलें

पार्टी के भीतर बढ़ती हलचल के बीच कुछ नेताओं के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। इन्हीं में सांसद सयानी घोष का नाम भी चर्चा में है। हालांकि, उनके संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनके रुख को लेकर अटकलों का दौर जारी है।

तीन दिनों में तीन बड़े इस्तीफे

टीएमसी के लिए बीते कुछ दिन राजनीतिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहे हैं। 8 जून को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा दिया था। इसके बाद 10 जून को सुष्मिता देव ने अपना पद छोड़ा और अब 11 जून को प्रकाश चिक बाराइक ने भी इस्तीफा दे दिया है। लगातार तीन दिनों में सामने आए इन घटनाक्रमों ने पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोकसभा सांसदों को लेकर भी चर्चाएं

राज्यसभा के अलावा लोकसभा में भी कुछ सांसदों के रुख को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। खबरों के मुताबिक, टीएमसी के कई सांसदों के पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने की अटकलें सामने आई हैं। हालांकि, इन दावों पर संबंधित नेताओं या पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ममता बनर्जी के सामने संगठन को मजबूत रखने की चुनौती

लगातार इस्तीफों और राजनीतिक उठापटक के बीच ममता बनर्जी के सामने पार्टी संगठन को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर होने वाले घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

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