अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी बरी, सुल्तानपुर कोर्ट से मिली बड़ी राहत

सुल्तानपुर: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी कथित मानहानिकारक टिप्पणी के मामले में सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत से राहत मिली है। सोमवार को अदालत ने 2018 में दर्ज इस मामले में राहुल गांधी को दोषी नहीं माना। फैसले के समय राहुल गांधी अदालत में मौजूद थे। यह मामला कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर की गई टिप्पणी से संबंधित है। भाजपा नेता विजय मिश्रा ने इसे मानहानिकारक बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

2018 में कर्नाटक चुनाव के दौरान हुई टिप्पणी से जुड़ा मामला

यह मामला मई 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। आरोप था कि इस दौरान उन्होंने अमित शाह के बारे में ऐसी टिप्पणी की, जिससे उनकी मानहानि हुई।

इसके बाद भाजपा नेता और सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ अदालत में शिकायत दाखिल की। शुरुआत में मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में हुई। बाद में इसे सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली एमपी-एमएलए अदालत में भेज दिया गया।

2023 में समन, 2024 में मिली थी जमानत

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था। इसके बाद 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी सुल्तानपुर की अदालत में पेश हुए। अदालत ने उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत दे दी थी।

उस समय राहुल गांधी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया था और मामले को सत्ता पक्ष की साजिश करार दिया था। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी और शिकायतकर्ता की ओर से गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।

शिकायतकर्ता की ओर से तीन गवाहों के बयान

मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता विजय मिश्रा की ओर से तीन गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इनमें विजय मिश्रा के अलावा अनिल मिश्रा और रामचंद दुबे शामिल थे। अदालत में मामले से जुड़े तथ्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी।

राहुल गांधी के वॉइस सैंपल की मांग भी हुई थी खारिज

मामले में शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी का वॉइस सैंपल लेने की मांग करते हुए अदालत में अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सेशन कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली।

दूसरे मामले में भी याचिका हो चुकी है खारिज

राहुल गांधी के खिलाफ एक अन्य मामले में मुस्लिम विरोधी टिप्पणी करने के आरोप को लेकर मुकदमा चलाने की मांग की गई थी। इस याचिका को एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने ठोस सबूत नहीं मिलने के आधार पर खारिज कर दिया था।

यह मामला मुजफ्फरनगर में करीब 13 साल पहले हुए दंगों से जुड़ा था। आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने दंगों में शामिल कुछ मुस्लिम युवकों के कथित संबंध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जोड़े थे। इस बयान को लेकर अधिवक्ता मोहम्मद अनवर ने अदालत में याचिका दाखिल की थी।

सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत में कई नेताओं के मामलों की सुनवाई

सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में सांसदों और विधायकों से जुड़े कई मामलों की सुनवाई हो चुकी है। इनमें आरोप साबित नहीं होने पर पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह, विधायक विनोद सिंह और सीताराम वर्मा, पूर्व विधायक सफदर रजा, अनूप संडा, संतोष पांडेय और चंद्रभद्र सिंह सोनू समेत कई नेताओं को राहत मिल चुकी है।

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