मेला से विधानसभा तक: संगम की लहरें पहुंचीं सियासत के किनारे

अजमल शाह
अजमल शाह

प्रयागराज के Prayagraj में आयोजित माघ मेले के दौरान शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य Avimukteshwaranand और मेला प्रशासन के बीच टकराव हुआ था, जो अब विधानसभा की बहस तक पहुंच गया है।

क्या कहा था योगी आदित्यनाथ ने?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधानसभा में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर बयान दिया। सरकार का कहना है कि भीड़ नियंत्रण और आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि थी, इसलिए पुलिस ने बैरियर पर रोक लगाई।

सरकार का दावा है कि “कानून का शासन” बनाए रखना ही प्राथमिक लक्ष्य था।

अखिलेश यादव का पलटवार

सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने मुख्यमंत्री के बयान को शंकराचार्य के प्रति अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्मगुरु के लिए अपशब्द कहना “शाब्दिक हिंसा” है।

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि महाकुंभ से जुड़े मामलों और मुआवज़े के मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने सरकार की नैतिकता पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की।

आखिर शुरू कैसे हुआ विवाद?

मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ रथ पर सवार होकर संगम स्नान के लिए निकले थे। भीड़ अधिक होने के कारण पुलिस ने बैरियर पर रोक लगाई।

बताया जाता है कि कुछ समर्थकों ने बैरियर पार करने की कोशिश की, जिससे अफरातफरी की स्थिति बनी। प्रशासन ने इसे सुरक्षा का मामला बताया, जबकि शंकराचार्य ने अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया।

राजनीति का तापमान बढ़ा

यह मुद्दा अब धार्मिक भावना और कानून-व्यवस्था के संतुलन की बहस में बदल चुका है। एक ओर सरकार सुरक्षा को प्राथमिकता बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे धार्मिक अपमान और प्रशासनिक असंवेदनशीलता से जोड़ रहा है।

संगम पर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा में “शब्दों का संग्राम” बन गया है। लगता है मेला खत्म हुआ, लेकिन बहस की भीड़ अभी कम नहीं होने वाली!

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