अब रजिस्ट्री में नहीं चलेगा कोई खेल! जमीन-मकान खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव, नामांतरण होगा आसान

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान की खरीद-बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद बैनामों में होने वाली अनियमितताओं पर लगाम लगाने की तैयारी है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री होते ही विलेख की कॉपी स्वतः संबंधित विभागों तक पहुंच जाएगी, जिससे नामांतरण की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आसान और पारदर्शी हो जाएगी।

सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग की ओर से राज्य सरकार को साझा की गई जानकारियों और हालिया कार्रवाई के बाद मुख्य सचिव स्तर पर महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का खाका तैयार किया गया। इसके तहत स्वतः पंजीकरण व्यवस्था को भी आसान बनाने पर काम किया जा रहा है।

रजिस्ट्री में पैन और आधार की जानकारी अनिवार्य

आयकर विभाग द्वारा सामने लाई गई अनियमितताओं के बाद इस माह से प्रत्येक रजिस्ट्री में पैन और आधार का विवरण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे रजिस्ट्री पूरी होते ही विलेख की कॉपी सीधे संबंधित विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर पहुंच जाए।

नई प्रक्रिया में स्वामित्व सत्यापन के बाद ही रजिस्ट्री की जाएगी। इससे विवादित संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। वहीं, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्री अभिलेखों में आधार कार्ड के केवल अंतिम चार अंक दर्ज करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि धोखाधड़ी की आशंका कम हो सके।

हर भूखंड को मिलेगी यूनिक प्रॉपर्टी आईडी

नक्शा परियोजना के तहत प्रदेश के प्रत्येक भूखंड को एक यूनिक प्रॉपर्टी आईडी से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इससे संपत्तियों का रिकॉर्ड अधिक सटीक और डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा।

बताया जा रहा है कि वर्ष की शुरुआत में आयकर विभाग ने प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में ऐसे कई मामले पकड़े थे, जिनमें 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों का बैनामा बिना पैन कार्ड का सही विवरण दर्ज किए किया गया था। जांच में 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों के बैनामों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। सबसे अधिक मामले आगरा और कानपुर मंडल में पाए गए।

अटैच संपत्तियों का भी कर दिया गया था बैनामा

आयकर विभाग की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कुछ जिलों में उन संपत्तियों का भी बैनामा कर दिया गया था, जिन्हें पहले से आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय या केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा अटैच किया जा चुका था।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई मामलों में पैन कार्ड के स्थान पर फॉर्म-16 का उपयोग किया गया, जबकि अधिकांश मामलों में उसका पूरा विवरण भी उपलब्ध नहीं था। इस खुलासे के बाद विभागीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

गवाहों के बयान के बाद ही होगा पंजीकरण

मोहनलालगंज रजिस्ट्री कार्यालय में धोखाधड़ी और जालसाजी रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब जमीन खरीदने और बेचने वाले पक्षों के साथ-साथ गवाहों के बयान दर्ज होने और दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर होने के बाद ही रजिस्ट्री का पंजीकरण किया जाएगा।

सब रजिस्ट्रार विभा द्विवेदी तिवारी ने कार्यभार संभालने के बाद पाया कि कई मामलों में दस्तावेज बिना आवश्यक हस्ताक्षरों और बयानों के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किए जा रहे थे। इसके बाद निर्देश जारी किए गए कि क्रेता, विक्रेता और गवाहों की उपस्थिति तथा उनके बयान दर्ज होने के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाए।

ऑनलाइन आधार सत्यापन पर भी जोर

रजिस्ट्री प्रक्रिया में सबसे अधिक समय आधार सत्यापन में लगने के कारण अब वकीलों और संबंधित पक्षों को ऑनलाइन आवेदन के दौरान ही आधार सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पंजीकरण प्रक्रिया तेज होगी और कार्यालयों में अनावश्यक देरी भी कम होगी।

 

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