सियोल: उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकिंग समूह ने कथित तौर पर ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण विकसित किए हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर हमलों को स्वचालित करने, चोरी किए गए डेटा का विश्लेषण करने और ज्यादा प्रभावी फिशिंग अभियान चलाने में किया जा सकता है। दक्षिण कोरिया की साइबर सुरक्षा कंपनी जीनियंस ने सोमवार को जारी अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस गतिविधि का संबंध उत्तर कोरिया से जुड़े किमसुकी हैकिंग समूह से बताया जा रहा है।
AI मॉडल को स्थानीय स्तर पर चलाने की तैयारी
जीनियंस के मुताबिक, जांच के दौरान ऐसे कई उपकरणों के इस्तेमाल के सबूत मिले हैं, जिनकी मदद से किमसुकी अपने कंप्यूटर सिस्टम पर ही AI मॉडल चला और नियंत्रित कर सकता है। इनमें ओलामा, GPT4All और Msty जैसे उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा समूह ने रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन यानी RAG तकनीक का भी इस्तेमाल किया है।
RAG तकनीक के जरिए दस्तावेजों में मौजूद जानकारी को खोजकर उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। जीनियंस का कहना है कि इस व्यवस्था से हैकर संवेदनशील या चोरी किए गए दस्तावेजों को किसी बाहरी AI सेवा पर भेजे बिना ही उनका विश्लेषण कर सकते हैं। इससे जानकारी को बाहरी AI कंपनियों तक पहुंचाने की जरूरत कम हो जाती है।
हैकिंग से लेकर डेटा विश्लेषण तक AI का इस्तेमाल
जीनियंस को जांच के दौरान AI एजेंट तैयार करने वाले फ्रेमवर्क, आवाज को टेक्स्ट में बदलने वाला सॉफ्टवेयर और कर्सर जैसे उपकरण भी मिले। कर्सर AI की सहायता से कोड तैयार करने वाला उपकरण है। साइबर सुरक्षा कंपनी ने इन उपकरणों को जिस अभियान से जोड़ा है, उसके आधार पर उसका कहना है कि किमसुकी का AI इस्तेमाल अब केवल फिशिंग संदेश तैयार करने तक सीमित नहीं रह गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, समूह मौजूदा AI मॉडलों का इस्तेमाल मैलवेयर तैयार करने, चोरी किए गए डेटा का विश्लेषण करने और साइबर हमलों को स्वचालित तरीके से संचालित करने की क्षमता विकसित कर रहा है।
नकली निवेश दस्तावेजों से भी बनाया जा रहा जाल
जीनियंस ने कुछ ऐसे दस्तावेजों का भी पता लगाने का दावा किया है, जो वित्त और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े हुए थे। कंपनी के अनुसार, इनमें से कुछ दस्तावेज ऐसे दिखाई देते हैं जैसे उन्हें AI की मदद से तैयार किया गया हो। इन्हें वास्तविक निवेश रिपोर्ट और कार्यालय में इस्तेमाल होने वाले दस्तावेजों की तरह तैयार किया गया था, ताकि सामने वाले व्यक्ति को वे विश्वसनीय लगें।
हालांकि, जीनियंस की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्या है फिशिंग अभियान?
फिशिंग एक सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी है, जिसमें हमलावर किसी भरोसेमंद बैंक, कंपनी या संस्था का रूप लेकर नकली ईमेल या संदेश भेजते हैं। इसका उद्देश्य लोगों से पासवर्ड, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी या अन्य निजी डेटा हासिल करना होता है।
किमसुकी का पहले से रहा है साइबर गतिविधियों में नाम
अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सरकारों के साथ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से उत्तर कोरिया पर सरकारी समर्थन वाले हैकिंग समूहों के जरिए जासूसी और आर्थिक चोरी करने के आरोप लगाते रहे हैं। किमसुकी भी ऐसे समूहों में शामिल बताया जाता है।
अमेरिका के वित्त विभाग ने वर्ष 2023 में किमसुकी पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे उत्तर कोरिया की किम जोंग उन सरकार के नियंत्रण वाला साइबर जासूसी समूह बताया था। अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, किमसुकी उत्तर कोरिया के रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए खुफिया जानकारी जुटाने का काम करता रहा है।
