मथुरा में बोरिंग के दौरान 11 केवी लाइन से टकराए लोहे के पाइप, गृहस्वामी समेत 3 की करंट लगने से मौत

मथुरा: शेरगढ़ थाना क्षेत्र के स्यारहा गांव में गुरुवार शाम सबमर्सिबल की री-बोरिंग के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। बोरिंग का काम पूरा होने के बाद लोहे की भारी तिपाई हटाते समय पाइप 11 केवी हाईटेंशन लाइन से टकरा गए। करंट की चपेट में आने से गृहस्वामी समेत दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने शेरगढ़-दलौता रोड पर जाम लगा दिया।

11 केवी हाईटेंशन लाइन से टकराए लोहे के पाइप

स्यारहा गांव निवासी मोहन पुत्र ओमप्रकाश के घर पर सबमर्सिबल की री-बोरिंग का काम चल रहा था। इसके लिए पास के गांगरौल गांव से मजदूर बुलाए गए थे। काम पूरा होने के बाद लोहे के पाइप की भारी तिपाई हटाई जा रही थी।

इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से पाइप का ऊपरी हिस्सा नलकूप फीडर की 11 केवी विद्युत लाइन से टकरा गया। करंट फैलते ही तिपाई पकड़े खड़े गृहस्वामी मोहन और मजदूर मोहन व सुल्तान इसकी चपेट में आ गए। तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसे के बाद मौके पर जुटे सैकड़ों ग्रामीण

तीन लोगों की मौत की खबर फैलते ही घटनास्थल पर अफरातफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। हादसे से गुस्साए ग्रामीणों ने शेरगढ़-दलौता रोड पर जाम लगा दिया।

ग्रामीणों का आरोप था कि हादसे के बाद बिजली आपूर्ति बंद कराने के लिए उन्होंने बिजली निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार फोन किया, लेकिन किसी ने कॉल नहीं उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि समय रहते बिजली बंद हो जाती तो राहत और बचाव कार्य में मदद मिल सकती थी।

पुलिस को मौके से लौटना पड़ा

हादसे की सूचना मिलने पर शेरगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेने का प्रयास किया। इस दौरान मृतकों के परिजन और ग्रामीणों ने विद्युत विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस टीम को भी मौके से वापस जाने को मजबूर कर दिया।

इसके बाद एसडीएम छाता अखिलेश त्रिपाठी, सीओ छाता भूषण वर्मा और पुलिस के अन्य अधिकारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाकर शांत कराया।

बिजली विभाग ने हादसे के लिए खुद को बताया जिम्मेदार नहीं

विद्युत निगम के कोसी डिवीजन के एक्सईएन सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि स्यारहा गांव में ट्यूबवेल के लिए बोरवेल कराया जा रहा था। इसी दौरान करीब 60 फीट लंबा लोहे का बोरवेल पाइप डिसबैलेंस होकर अनियंत्रित हो गया और करीब 10 फीट की दूरी से गुजर रही 11 केवी लाइन पर गिर गया।

उन्होंने कहा कि हादसे में विभाग का कोई पोल या तार नहीं टूटा है। विद्युत विभाग की ओर से हादसे के लिए खुद को जिम्मेदार नहीं बताया गया है।

ग्रामीणों का दावा- काफी देर तक जारी रही बिजली सप्लाई

ग्रामीणों के मुताबिक, हादसे के बाद भी 11 केवी लाइन में काफी देर तक बिजली का करंट दौड़ता रहा। मौके पर चीख-पुकार के बीच ग्रामीणों ने दलौता फीडर के लाइनमैन और संबंधित विभागीय इंजीनियरों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर किसी ने फोन नहीं उठाया।

इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया।

ग्रामीण खुद बिजलीघर पहुंचे और बंद कराई सप्लाई

जब बिजली विभाग के जिम्मेदार लोगों से संपर्क नहीं हो पाया तो स्यारहा गांव के आक्रोशित ग्रामीण खुद वाहनों से दलौता फीडर पहुंचे। वहां दबाव बनाकर उन्होंने बिजली आपूर्ति बंद कराई।

ग्रामीणों का कहना था कि अगर घटना के तुरंत बाद उनकी कॉल रिसीव कर बिजली की लाइन बंद कर दी जाती तो राहत कार्य तेजी से शुरू किया जा सकता था। हादसे के बाद ग्रामीणों ने पुलिस को शव उठाने से भी रोक दिया था।

 

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