नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश के युवाओं से खास अपील की। उन्होंने युवाओं से देश के लिए एक-दो घंटे का समय देने को कहा। पीएम मोदी की यह अपील किसी चुनाव, अभियान या सरकारी योजना के लिए नहीं, बल्कि जनगणना 2027 के लिए थी। उन्होंने युवाओं से अपने परिवार के साथ बैठकर जनगणना में दी जाने वाली जानकारी को ध्यान से भरने और परिवार के प्रत्येक सदस्य का विवरण सही दर्ज कराने में मदद करने की अपील की।
‘मैं आपका एक घंटा चाहता हूं’, पीएम मोदी ने युवाओं से क्या कहा?
लाल किले से युवाओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वह उनसे देश के लिए मदद मांग रहे हैं। उन्होंने युवाओं से जनगणना की प्रक्रिया में नेतृत्व करने और अपने परिवार के सदस्यों को इसमें सक्रिय रूप से शामिल करने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को लग सकता है कि एक-दो घंटे में वे देश के लिए आखिर क्या कर सकते हैं, लेकिन यही समय देश के लिए बड़ी ताकत बन सकता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि जनगणना के दौरान अपने परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी ध्यान से जांचें और हर विवरण सही तरीके से दर्ज करें।
पीएम मोदी ने विशेष रूप से नाम की स्पेलिंग और परिवार से जुड़ी अन्य जानकारियों को सही दर्ज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आंकड़े जितने सटीक होंगे, सरकार के लिए योजनाएं बनाने और देश के विकास की सही दिशा तय करने में उतनी ही आसानी होगी।
जनगणना को लेकर पीएम मोदी ने क्या बताया महत्व?
प्रधानमंत्री ने जनगणना को केवल लोगों की गिनती करने की प्रक्रिया मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि जनगणना से जुटाई गई जानकारी देश की नीतियां और सरकारी योजनाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सरकार के पास अगर यह सटीक जानकारी हो कि देश में कितने लोग हैं, उनकी उम्र क्या है, वे कहां रहते हैं, उनकी शिक्षा का स्तर क्या है, वे किस तरह का काम करते हैं और समाज की अलग-अलग जरूरतें क्या हैं, तो उसी आधार पर संसाधनों और योजनाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
यही वजह है कि पीएम मोदी ने युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जनगणना में दर्ज छोटी-सी गलती भी बाद में बड़े स्तर पर तैयार होने वाले आंकड़ों को प्रभावित कर सकती है।
Census 2027 इस बार क्यों है खास?
जनगणना 2027 कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह भारत की 16वीं जनगणना और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में होने वाली जनगणना को टालना पड़ा था।
इस बार जनगणना में तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक पहली बार जनगणना डिजिटल तरीके से संचालित की जा रही है। गणनाकर्मी मोबाइल ऐप के जरिए आंकड़े दर्ज करेंगे। इसके साथ ही लोगों को Self-Enumeration यानी खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा भी दी गई है।
युवाओं से आगे आने की पीएम मोदी की अपील को इसी डिजिटल बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। मोबाइल और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करने में सहज युवा अपने परिवार के बुजुर्गों और अन्य सदस्यों की जानकारी दर्ज करने और उसे जांचने में मदद कर सकते हैं।
घर बैठे खुद भर सकेंगे जनगणना की जानकारी
इस बार नागरिकों को अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन दर्ज करने का विकल्प भी दिया गया है। Self-Enumeration की सुविधा के जरिए नागरिक मोबाइल नंबर और जरूरी विवरण के माध्यम से पोर्टल पर लॉग इन कर अपनी जानकारी भर सकते हैं।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें Self-Enumeration ID यानी SE ID मिलेगी। इसे बाद में घर आने वाले गणनाकर्मी को देना होगा, ताकि दर्ज जानकारी को जनगणना के रिकॉर्ड में शामिल और सत्यापित किया जा सके।
Self-Enumeration का उद्देश्य लोगों को अपनी जानकारी अपनी सुविधा के अनुसार दर्ज करने का अवसर देना है। इससे डेटा दर्ज करते समय होने वाली गलतियों को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
17 अगस्त से शुरू होगा अहम चरण
जनगणना की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में पूरी की जा रही है। केंद्र सरकार के मुताबिक Census 2027 को दो मुख्य चरणों में संचालित किया जा रहा है। पहले चरण में House Listing and Housing Census के तहत मकानों और उनमें उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राज्यों की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में आयोजित किया जा रहा है।
इसके बाद Population Enumeration यानी वास्तविक आबादी की गणना का चरण होगा। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार बर्फीले और गैर-सिंक्रोनस क्षेत्रों में आबादी की गणना सितंबर 2026 में होगी, जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा।
देश के बाकी हिस्सों के लिए 17 से 31 अगस्त 2026 के बीच Self-Enumeration की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इसके बाद अगले साल घर-घर जाकर आबादी की गणना की जाएगी।
इस बार जनगणना में जाति की जानकारी भी ली जाएगी
Census 2027 की सबसे बड़ी खासियतों में जाति की जानकारी शामिल किया जाना भी है। केंद्र सरकार ने Population Enumeration चरण के लिए 40 सवालों वाला प्रश्नपत्र अधिसूचित किया है। इसमें जाति से जुड़ा सवाल भी शामिल है।
यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा जब सामान्य जनगणना में सभी लोगों से जाति की जानकारी ली जाएगी। वर्ष 1931 के बाद पहली बार देश की जनगणना में व्यापक स्तर पर जाति गणना का प्रावधान किया गया है। इससे देश के सामाजिक ढांचे और आबादी की संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आ सकते हैं।
जाति के अलावा भी कई तरह की जानकारियां ली जाएंगी
इस बार जनगणना का दायरा पहले के मुकाबले व्यापक रखा गया है। अधिसूचित सवालों में शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, रोजगार, व्यवसाय, प्रवास, भाषा और परिवार से जुड़ी कई जानकारियां शामिल हैं।
इसके अलावा नए सवालों में नागरिकों से बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारियों से संबंधित विवरण भी मांगे जाएंगे।
इस तरह Census 2027 केवल देश में रहने वाले लोगों की संख्या पता करने तक सीमित नहीं रहेगी। इसके जरिए भारत की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और डिजिटल स्थिति से जुड़ी तस्वीर को अधिक विस्तार से समझने की कोशिश की जाएगी।
