नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट की नसीहत के अगले ही दिन आयोग ने दिल्ली समेत छह राज्यों में SIR से जुड़ी समयसीमा बढ़ा दी है। इसके तहत दिल्ली में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की तारीख आगे बढ़ाई गई है, जबकि नागालैंड, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में भी यह प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। आयोग ने इन राज्यों में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की नई तारीखें भी तय कर दी हैं।
चुनाव आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर नई समयसीमा की जानकारी दी है। इसके मुताबिक नागालैंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और हरियाणा में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। वहीं दिल्ली में अंतिम सूची जारी करने की तारीख 22 दिसंबर तय की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद आयोग ने बढ़ाई समयसीमा
चुनाव आयोग का यह फैसला दिल्ली में SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई के एक दिन बाद आया है। शीर्ष अदालत ने आयोग से 30 अक्टूबर की समयसीमा के बाद भी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका देने पर विचार करने को कहा था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मतदान के अधिकार को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए दिल्ली के उन करीब 47 लाख मतदाताओं तक पहुंचने के लिए व्यवस्था बनाने की सलाह दी थी, जिनके नाम SIR के दौरान मसौदा मतदाता सूची से हट गए थे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग से पूछा था कि जिन लोगों के नाम 2026 की मतदाता सूची में पहले से शामिल थे, उन्हें मसौदा सूची से नाम हटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने की जरूरत क्यों पड़ रही है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए किया जाता है।
अदालत ने आयोग को सलाह दी थी कि वह कोई निश्चित समयसीमा तय करने के बजाय प्रभावित मतदाताओं के SIR फॉर्म स्वीकार करे। साथ ही उनसे फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 भरवाने के बजाय उनके पहले से जमा SIR फॉर्म के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर विचार करे।
पांच राज्यों में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का फिर मिलेगा मौका
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और नागालैंड में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। इन राज्यों में यह चरण पहले ही अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो चुका था।
इससे पहले महाराष्ट्र में 26 अक्टूबर, हरियाणा में 30 सितंबर, तेलंगाना में 7 अक्टूबर, आंध्र प्रदेश में 22 अक्टूबर और नागालैंड में 20 अक्टूबर को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा खत्म हो गई थी। अब आयोग ने इन राज्यों के मतदाताओं को एक बार फिर मौका दिया है।
किस राज्य में कब तक जमा होंगे फॉर्म?
चुनाव आयोग की नई समयसीमा के मुताबिक महाराष्ट्र में 13 नवंबर तक, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में 20 नवंबर तक, नागालैंड में 25 नवंबर तक और तेलंगाना में 26 नवंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी।
दिल्ली में भी दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी गई है। इसके अलावा दावों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी गई है। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची अब 22 दिसंबर को प्रकाशित होगी।
इससे पहले चुनाव आयोग ने 14 मई को 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का तीसरा चरण शुरू किया था। अब तक 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
छूटे हुए मतदाताओं को मिलेगी राहत
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार पंजीकृत मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए गणना चरण के दौरान फॉर्म जमा करना होता है। ऐसा नहीं करने पर उनका नाम मसौदा सूची से हट सकता है।
हालांकि, मसौदा सूची में नाम शामिल नहीं होने वाले मतदाता फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाने का दावा कर सकते हैं। वहीं, गलत तरीके से नाम शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जाता है।
समयसीमा बढ़ाए जाने से उन मतदाताओं को राहत मिलेगी, जिनके नाम किसी वजह से मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। आयोग के इस फैसले से प्रभावित नागरिकों को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
