डाकघरों में डिजिटल भुगतान की व्यवस्था बनी उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब

बांगरमऊ,उन्नाव डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देशभर में ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है। बैंकिंग सेवाओं से लेकर सरकारी कार्यालयों और विभिन्न संस्थानों तक डिजिटल लेनदेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है। लेकिन जब डिजिटल भुगतान की व्यवस्था के चलते आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़े, तो इस व्यवस्था की व्यावहारिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला डाकघरों में रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट तथा अन्य डाक सेवाओं के लिए भुगतान करने पहुंच रहे उपभोक्ताओं के सामने आने वाली दिक्कतों से जुड़ा है।


डाकघरों में सरकारी एवं निजी दस्तावेजों की रजिस्ट्री कराने, स्पीड पोस्ट भेजने, जरूरी कागजात संबंधित विभागों तक पहुंचाने तथा अन्य डाक सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

इनमें विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी, किसान, बुजुर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिक शामिल होते हैं। कई लोगों के लिए डाकघर आज भी पत्राचार और जरूरी दस्तावेज भेजने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन डाक सेवाओं के लिए शुल्क जमा करने के दौरान डिजिटल भुगतान की व्यवस्था के चलते कुछ उपभोक्ताओं को परेशानी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

उपभोक्ताओं का कहना है कि रजिस्ट्री और स्पीड पोस्ट कराने के लिए जब वे डाकघर पहुंचते हैं, तो उनसे नकद रुपये लेने के बजाय ऑनलाइन माध्यम से भुगतान करने को कहा जाता है।

ऐसे में जिन लोगों के पास डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं है अथवा जो इसका इस्तेमाल करने में सहज नहीं हैं, उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है।
आज भी समाज में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जो रोजमर्रा के लेनदेन के लिए नकद रुपये का ही इस्तेमाल करते हैं। कई बुजुर्ग नागरिक स्मार्टफोन चलाने में सहज नहीं होते, जबकि कुछ लोगों के पास इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई या अन्य डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं होती। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अनेक नागरिकों के लिए भी ऑनलाइन भुगतान करना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसी स्थिति में यदि कोई व्यक्ति जरूरी दस्तावेज की रजिस्ट्री या स्पीड पोस्ट कराने डाकघर पहुंचता है और उसके पास नकद रुपये ही उपलब्ध हैं, तो उसके सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है। उसे ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की मदद लेनी पड़ती है अथवा भुगतान का अन्य माध्यम तलाशना पड़ता है। इससे न केवल उसका समय बर्बाद होता है, बल्कि जरूरी काम में देरी होने की आशंका भी बनी रहती है।विशेष रूप से उन लोगों की परेशानी बढ़ सकती है, जिन्हें न्यायालय, सरकारी विभाग, शैक्षणिक संस्थान या किसी अन्य कार्यालय में निर्धारित समयसीमा के भीतर दस्तावेज भेजने होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में भुगतान की प्रक्रिया सरल और सुलभ होना बेहद आवश्यक है। डिजिटल भुगतान आधुनिक समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है। इससे लेनदेन में पारदर्शिता आती है और भुगतान का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहता है। लेकिन देश में सभी नागरिकों की डिजिटल सुविधाओं तक समान पहुंच अभी सुनिश्चित नहीं है। ऐसे में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन लोगों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जो तकनीकी कारणों से ऑनलाइन भुगतान नहीं कर पाते। डाकघर जैसी सार्वजनिक सेवा से जुड़े संस्थानों में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भुगतान की प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए सहज हो। डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराना और लोगों को इसका इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यदि किसी सेवा में नकद भुगतान की सुविधा सीमित या अनुपलब्ध की जाती है, तो उसके पीछे लागू विभागीय नियमों और निर्देशों की स्पष्ट जानकारी भी उपभोक्ताओं को मिलनी चाहिए।
इस मामले में यह भी जरूरी है कि संबंधित डाकघर के कर्मचारियों की ओर से उपभोक्ताओं को भुगतान के उपलब्ध विकल्पों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि किसी को अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े।

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