बांगरमऊ,उन्नाव नगर निकायों (नगर पालिका व नगर पंचायतों) के सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए परिवार रजिस्टर की नकल बनवाना एक बड़ी मुसीबत बन गया है। विभिन्न सरकारी-गैर सरकारी कार्यों, योजनाओं का लाभ लेने, राशन कार्ड बनवाने, पेंशन, और जमीनी-कानूनी कागजातों के लिए लोग जब निकाय कार्यालयों के चक्कर काटते हैं, तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।
विभिन्न नगर निकायों से परिवार रजिस्टर की नकल जारी न होने के कारण स्थानीय निवासियों में काफी रोष व्याप्त है। जब नगरवासी परिवार रजिस्टर की नकल प्राप्त करने के लिए नगर पालिका या नगर पंचायत कार्यालय जाते हैं, तो स्थानीय निकाय प्रशासन असमर्थता जताते हुए उन्हें लौटा देता है। निकाय अधिकारियों का कहना है कि “उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916” में नगर निकायों के स्तर पर ‘परिवार रजिस्टर’ (कुटुम्ब रजिस्टर) के रखरखाव या उसकी नकल जारी करने का कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं किया गया है।
यह व्यवस्था केवल उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों में लागू है। परिणामस्वरूप, जो क्षेत्र ग्रामीण से शहरी (नगर पालिका/नगर पंचायत) में शामिल हो चुके हैं, वहाँ के निवासियों का रिकॉर्ड अटक कर रह जाता है। नागरिकों का कहना है कि सरकारी लाभ से वंचित, वृद्धावस्था/विधवा पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन कार्ड में नाम संशोधन/जोड़ने और अन्य कार्यों के लिए परिवार रजिस्टर की नकल मांगी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो पंचायत सचिव से यह नकल आसानी से मिल जाती है, लेकिन शहरी क्षेत्र घोषित होते ही निकाय प्रशासन कानून का हवाला देकर टाल देता है। कई बार तहसील और ब्लॉक कार्यालय भी लोगों को वापस नगर पालिका भेज देते हैं, जिससे नागरिक बीच में पीसकर रह जाते हैं। प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने प्रदेश सरकार और शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 में आवश्यक संशोधन या नया शासनादेश जारी किया जाए, ताकि निकाय स्तर पर भी परिवार रजिस्टर बनाए जा सकें। जिस प्रकार ग्राम पंचायतों के लिए पोर्टल पर परिवार रजिस्टर की व्यवस्था है, उसी प्रकार शहरी निकायों के लिए भी ऑनलाइन नकल जारी करने का प्रावधान किया जाए। जब तक नियमों में संशोधन नहीं होता, तब तक नागरिकों को किसी वैकल्पिक आधिकारिक प्रमाण पत्र (जैसे वार्ड पार्षद/सभासद सत्यापन/निकाय प्रमाण पत्र) के आधार पर काम कराने की छूट दी जाए। “जब गांव नगर पंचायत या पालिका में शामिल होते हैं, तो सहूलियतें मिलनी चाहिए, लेकिन यहाँ एक छोटे से कागजात के लिए नगरवासी वर्षों से दंश झेलते हैं। शासन को इस पुराने कानून में तत्काल ढील देनी चाहिए।”
