आराधना फिल्म रेट्रो रिव्यू: राजेश का सुपरस्टार बूस्टर और किशोर दा की वापसी

1969 की “आराधना” वो फिल्म है जिसने प्यार, त्याग, साज़िश और “मेरे सपनों की रानी” जैसी चाय की चुस्की वाला रोमांस परोसा। शक्ति सामंत की यह फिल्म बस फिल्म नहीं थी — यह राजेश खन्ना के माथे पर टिका सुपरस्टार का तिलक थी। बिहार बुला रहल बा कि कुर्सी?” तेजस्वी के तंज पर चिराग चुप मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू? इस गाने ने लोगों को इतना दीवाना किया कि कुछ ने रेलवे टिकट सिर्फ इस सीन को रीक्रिएट करने के लिए खरीदा। राजेश खन्ना कार में, शर्मिला टैगोर…

Read More

बैजू बावरा रेट्रो रिव्यू: जब सुरों से हुआ प्रतिशोध | क्लासिक म्यूज़िकल का जादू

1952 में जब बैजू बावरा रिलीज़ हुई, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि संगीत से भी बदला लिया जा सकता है। लेकिन बैजू ने ये करके दिखाया — और वो भी तानसेन से! अगर आज कोई कहे “मैं राग भैरवी में तेरा सर्वनाश कर दूंगा”, तो शायद ब्रेकअप कर ले… लेकिन तब ये डायलॉग क्लाइमेक्स था। भारत भूषण की एक्टिंग और मीना कुमारी की मासूमियत बैजू बने भारत भूषण — चेहरे पर संगीत का दर्द और आँखों में मुरली का जूनून। और मीना कुमारी? जैसे राग यमन को…

Read More

पहले सुपरस्टार की 10 दिलचस्प बातें | Tribute to Rajesh Khanna

18 जुलाई 2012, वह दिन जब भारत ने अपने पहले सुपरस्टार को खोया। राजेश खन्ना, जिन्हें फैन्स ने ‘काका’ कहा, वो सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे – वो महसूस थे। आइए आज उनकी याद में जानते हैं उनके जीवन के कुछ खास और दिलचस्प किस्से — जो उन्हें बनाते हैं ‘Pasha of Passion’ और भारत का पहला सुपरस्टार। यूपी में स्वच्छता का महाकुंभ! लखनऊ-प्रयागराज-गोरखपुर ने मारी बाजी 1. “डिंपल” से “आशीर्वाद” तक – एक बंगले की फिल्मी कहानी राजेश खन्ना ने अभिनेता राजेन्द्र कुमार से एक बंगला खरीदा जिसका नाम…

Read More

योगी बायोपिक- “अजेय” पर सेंसर की अड़चन! कोर्ट पहुंची फिल्म

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बनी फिल्म “अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी” का रास्ता अब अदालत से होकर गुजर रहा है। 1 अगस्त को रिलीज़ के लिए तैयार इस फिल्म को अब तक सेंसर बोर्ड की हरी झंडी नहीं मिली है, जिसके चलते फिल्म निर्माता बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। डील पक्की समझो! ट्रंप बोले- अमेरिका के लिए भारत के बाजार और खुलेंगे सेंसर बोर्ड बोले – “2 दिन और दीजिए, निर्णय देंगे” सुनवाई के दौरान सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने कोर्ट को…

Read More

रेट्रो रिव्यू- मेरा नाम जोकर: जब राज कपूर बोले – “दुनिया हंसती है, मैं रोता हूं”

साल था 1970, जब राज कपूर ने तय किया कि अब वो सिर्फ दिल ही नहीं, दर्शकों का धैर्य भी टेस्ट करेंगे। “मेरा नाम जोकर” रिलीज़ हुई – एक 4 घंटे लंबी भावनात्मक जर्नी, जिसमें प्रेम, पीड़ा और पब्लिक की प्यास सब कुछ था… बस पॉपकॉर्न जल्दी खत्म हो गया। जोकर की कहानी या ऑडियंस की अग्निपरीक्षा? राजू जोकर (राज कपूर) की ज़िंदगी तीन हिस्सों में बंटी है, जैसे हर सरकारी स्कीम – स्टूडेंट फेज, सर्कस फेज और ‘अब बस करो भाई’ फेज। टीचर वाला क्रश – सिमी गरेवाल से…

Read More

“Sidhu Moosewala की वापसी… होलोग्राम में? अब रूह भी करेगी टूर!”

सिद्धू मूसेवाला के चाहने वालों के लिए ये खबर भावुक कर देने वाली है। सिंगर के सोशल मीडिया हैंडल पर हाल ही में एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें ये एलान हुआ कि 2026 में उनका ‘Signed To God World Tour’ होगा – और वो भी होलोग्राम के ज़रिए। अब फैंस सोच में पड़ गए – “भाई, जो नहीं रहे, वो स्टेज पर कैसे आएंगे?” मां ने की शाहरुख़ को फंसाने की साजिश, लिव-इन पार्टनर ने खोला राज होलोग्राम से होगा टूर – टेक्नोलॉजी बोले ‘लॉन्ग लिव मूसेवाला!’ यह वर्ल्ड…

Read More

रिव्यू : निकिता रॉय में भूत भी शर्माएं, सोनाक्षी का स्वैग छा जाए!

सोनाक्षी सिन्हा की नई पेशकश “निकिता रॉय” किसी आम मसाला फिल्म जैसी नहीं, ये भूत-प्रेतों और झूठे बाबाओं की दुनिया से निकलकर सीधे आपकी रीढ़ की हड्डी में सनसनी भरने आई है। और हां, इस बार डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठे हैं खुद उनके भाई – कुश एस सिन्हा। भाई साहब की पहली फिल्म है, लेकिन उन्होंने डराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कहानी में ट्विस्ट और बाबा की पोल खोल फिल्म की कहानी घुमावदार है, जैसे पुराने जमाने के ज़मीन के झगड़े। सोनाक्षी बनी हैं निकिता, जो एक खोजी…

Read More

‘मदर इंडिया’ – मां भी, मसीहा भी और मेकअप में खेत जोतती महिला भी!

“मां तो आखिर मां होती है… लेकिन जब वही मां बंदूक उठा ले, तो या तो क्रांतिकारी कहलाती है या Meena Kumari का स्ट्रॉन्ग वर्ज़न!” उदित राज ने उठाए सवाल: अंतरिक्ष में दलित क्यों नहीं गया? सिनेमाई भूमि पूजन: खेत, गरीबी और पसीने में लिपटी मां 1957 में मेहबूब खान ने जो किया, उसे आज कोई निर्देशक एक फिल्म में नहीं कर पाएगा – उन्होंने “मां” को राष्ट्र बना दिया और राष्ट्र को सीधा emotional guilt-trip पर भेज दिया। नर्गिस उस वक्त मां बनीं जब असल ज़िंदगी में वो सुनील…

Read More

हीर राँझा (1970) रेट्रो रिव्यू: शायरी में डूबी मोहब्बत की सबसे दर्दनाक फिल्म

1970 में चेतन आनंद ने जो किया, उसे आज की पीढ़ी “Cinematic Audacity” कहेगी। पूरी फिल्म शायरी में बोलती है! नहीं, मतलब सच में — हर किरदार, हर डायलॉग, हर झगड़ा तक, सबकुछ तुकबंदी में। और इस प्रयोग को नाकाम नहीं, मास्टरपीस कहा गया। अखिलेश केदारनाथ बना बैठे, शंकराचार्य बन बैठे क्या-अब काबा भी बनवायेंगे ? राजकुमार: एक्टर नहीं, चलता-फिरता उर्दू शेर अगर आपको लगता है कि आजकल के हीरो स्टाइलिश हैं, तो ज़रा राजकुमार को देख लीजिए – नज़रों से तलवार चलाते हैं और जुबान से इश्क। उनके डायलॉग…

Read More

‘चलती का नाम गाड़ी’ रेट्रो रिव्यू – बॉलीवुड क्लासिक जो आज भी दिलों में है

जब हम बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों की बात करते हैं, तो 1958 की ‘चलती का नाम गाड़ी’ हमेशा याद आती है। सत्येन बोस द्वारा निर्देशित इस फिल्म में मधुबाला, अशोक कुमार, किशोर कुमार और अनूप कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों ने अभिनय किया था। यह फिल्म न केवल उस दौर का एक शानदार संगीतमय कॉमेडी हिट थी, बल्कि आज भी बॉलीवुड के चाहने वालों के बीच एक क्लासिक के रूप में पहचानी जाती है। मां ने की शाहरुख़ को फंसाने की साजिश, लिव-इन पार्टनर ने खोला राज कहानी: साधारण, लेकिन मजेदार…

Read More