BSP का पश्चिमी यूपी पर बड़ा फोकस: मायावती जल्द करेंगी प्रत्याशियों का ऐलान, सोशल इंजीनियरिंग के सहारे चुनावी रणनीति तेज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। पार्टी प्रमुख मायावती ने संगठन को निर्देश दिए हैं कि मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली मंडल की करीब एक-तिहाई विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों का चयन जुलाई के भीतर ही पूरा कर लिया जाए। पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के साथ सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर भी तेजी से काम कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लगभग 100 विधानसभा सीटों में से 30 से 35 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन जुलाई में ही किए जाने की तैयारी है। इनमें से करीब 15 नाम तय हो चुके हैं और स्थानीय स्तर पर उनकी घोषणा की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

सोशल इंजीनियरिंग पर रहेगा विशेष जोर

मंगलवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में मायावती ने सदस्यता अभियान, बूथ स्तर तक संगठन के विस्तार और साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवारों के चयन पर चर्चा की।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और पिछड़े वर्ग के नेताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है। बसपा पहले चयनित नेताओं को विधानसभा प्रभारी नियुक्त करती है और चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद आधिकारिक प्रत्याशी सूची जारी करती है।

आधी से ज्यादा सीटों पर जल्द प्रत्याशी तय करने की तैयारी

जानकारी के अनुसार, मायावती चाहती हैं कि प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से आधे से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों का चयन जल्द पूरा कर लिया जाए, ताकि संबंधित क्षेत्रों में समय रहते चुनावी तैयारियां शुरू की जा सकें और संगठन को मजबूत किया जा सके।

माना जा रहा है कि समय से प्रत्याशी घोषित करने से पार्टी को चुनावी अभियान मजबूत करने के साथ भविष्य में किसी संभावित राजनीतिक समीकरण की स्थिति में भी अपनी दावेदारी मजबूत रखने में मदद मिल सकती है।

गठबंधन की अटकलों पर भी नजर

राजनीतिक गलियारों में बसपा और कांग्रेस के संभावित गठबंधन को लेकर भी चर्चा जारी है। हालांकि, मायावती सार्वजनिक तौर पर गठबंधन की संभावनाओं से लगातार इनकार करती रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुकी बसपा भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर रणनीतिक फैसले ले सकती है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर है बसपा

बहुजन समाज पार्टी पिछले करीब डेढ़ दशक से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन मजबूत करने और समय से उम्मीदवार घोषित करने की रणनीति को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

Related posts