मानसून सत्र से पहले लोकसभा स्पीकर की बड़ी बैठक, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले रविवार को लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की अहम बैठक आयोजित की गई। लोकसभा स्पीकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र की कार्यवाही और सदन के एजेंडे को लेकर विचार-विमर्श करना था।

जनहित और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा

बैठक के दौरान सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों ने सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले विधायी कार्यों और अन्य संसदीय गतिविधियों पर अपने सुझाव रखे। साथ ही सार्वजनिक महत्व और राष्ट्रीय चिंता से जुड़े कई मुद्दों को सदन में चर्चा के लिए शामिल करने का प्रस्ताव भी दिया गया।

सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील

लोकसभा स्पीकर ने बैठक में सभी दलों से रचनात्मक चर्चा, सार्थक भागीदारी और संसदीय परंपराओं का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी चर्चा तभी संभव है जब सभी दल सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करें।

सुझावों के आधार पर तय होगा एजेंडा

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने सदस्यों की ओर से दिए गए सुझावों पर विचार किया। चर्चा का कार्यक्रम और विभिन्न कार्यों के लिए समय का निर्धारण संसदीय प्रक्रिया के अनुरूप सरकार और राजनीतिक दलों के नेताओं से परामर्श के बाद किया जाएगा।

स्पीकर ने विश्वास जताया कि सभी सदस्य मिलकर संसद का मानसून सत्र गरिमापूर्ण, उत्पादक और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित बनाएंगे।

किरेन रिजिजू ने विपक्ष से मांगा सहयोग

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सभी विपक्षी दलों से मानसून सत्र के दौरान सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन में लगातार हंगामा करने से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता। उनका कहना था कि सरकार द्वारा लाए जाने वाले विधेयकों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए और संसद की कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए।

एनसीपीआई के सांसदों को बैठक में बुलाने पर भी दी सफाई

सर्वदलीय बैठक में नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़े सांसदों को आमंत्रित किए जाने के फैसले पर उठे सवालों का जवाब देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि इतने सांसदों को बैठक से बाहर रखना उचित नहीं होता। उन्होंने विपक्ष के कुछ दलों द्वारा बैठक से वॉकआउट को उनका लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए इसे सांकेतिक विरोध करार दिया।

 

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