जूते की धमकी, दौड़ की सजा और फिर क्लीन चिट! मामला क्यों उबाल पर है?

अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से आई एक खबर ने शासन-प्रशासन के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को फिर उजागर कर दिया है। महसी तहसील में तैनात एक होमगार्ड द्वारा लगाए गए आरोप सिर्फ प्रशासनिक अनुशासन का सवाल नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा से जुड़ा मामला बन गए हैं।

सरकार एक ओर “संवेदनशील प्रशासन” की बात करती है, दूसरी ओर यह प्रकरण सिस्टम पर असहज सवाल खड़े कर रहा है।

होमगार्ड की आपबीती: “सम्मान कुचला गया”

महसी तहसील में तैनात होमगार्ड रमाकांत मिश्रा ने SDM आलोक प्रसाद के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

रमाकांत के आरोप बेहद गंभीर हैं जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का दावा। सार्वजनिक रूप से “जूते से मारने” की धमकी। तहसील परिसर में जबरन पांच राउंड दौड़। मानसिक प्रताड़ना और धार्मिक पहचान पर चोट।

होमगार्ड का कहना है कि इस अपमान ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया, यहां तक कि आत्मघाती कदम की बात उनके मन में आने लगी।

“कागज़ों में कर्मचारी ‘मानव संसाधन’ हैं, ज़मीन पर कभी-कभी ‘ट्रेनिंग मटीरियल’ बन जाते हैं।”

प्रशासन की जांच: “आरोप निराधार”

मामला तूल पकड़ते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और विभागीय जांच के आदेश दिए गए। लेकिन जांच रिपोर्ट ने पूरी कहानी को उलट दिया। प्रशासन का दावा है कि आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। न दस्तावेज, न स्वतंत्र गवाह, शुरुआती जांच में आरोप निराधार पाए गए।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष रही और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला गया। हालांकि एक लाइन ने बहस को जिंदा रखा—“नए साक्ष्य मिलने पर दोबारा कार्रवाई हो सकती है।”

न्याय की मांग और बढ़ता सामाजिक दबाव

इस पूरे मामले ने सामाजिक संगठनों और कर्मचारी यूनियनों को सक्रिय कर दिया है।

उनका सवाल सीधा है अगर कोई कर्मचारी आत्मघाती बात कर रहा है, तो क्या सिर्फ “सबूत नहीं मिले” कह देना काफी है?

लोगों का मानना है कि पावर गैप के कारण सच दब सकता है। मांग है कि मामले की ऊपरी स्तर से पारदर्शी समीक्षा हो।

प्रशासन बनाम संवेदना?

प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। लेकिन जमीनी सवाल अब भी कायम है— क्या छोटे कर्मचारी की आवाज़ सिस्टम में सच में सुनी जाती है? या फिर फाइलों में दब जाना ही उसकी नियति है?

यह मामला सिर्फ एक होमगार्ड और SDM के बीच का विवाद नहीं, बल्कि पावर, गरिमा और जवाबदेही की परीक्षा है। अब नजरें इस पर हैं कि न्याय ऊपर तक पहुंचेगा या यहीं रुक जाएगा।

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