
गोरखपुर में आज सिर्फ एक जयंती नहीं मनाई गई… बल्कि एक विचार, एक संघर्ष और एक क्रांति को याद किया गया। डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर पूरा शहर “समानता और न्याय” के संदेश से गूंज उठा। प्रशासन से लेकर राजनीतिक दलों तक—हर मंच पर बाबा साहब को नमन किया गया।
डीएम दीपक मीणा ने दी श्रद्धांजलि
गोरखपुर में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बाबा साहब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समान अधिकारों की ऐसी मिसाल है, जो हर पीढ़ी को दिशा देती है।
संविधान से मिला देश को मजबूत आधार
डीएम ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ने भारत को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा दिया। उन्होंने हर नागरिक को समानता, न्याय और गरिमा का अधिकार दिलाया—जो आज भी देश की सबसे बड़ी ताकत है।
सामाजिक न्याय के लिए आजीवन संघर्ष
कार्यक्रम में बाबा साहब के उस संघर्ष को भी याद किया गया, जिसमें उन्होंने छुआछूत, भेदभाव और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। उनका प्रसिद्ध संदेश—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—आज भी समाज के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
अधिकारियों ने लिया संकल्प
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने यह संकल्प लिया कि वे बाबा साहब के विचारों को अपने कार्यों में अपनाएंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएंगे। प्रशासन ने पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई।

NCP कार्यालय में भी भव्य आयोजन
इसी कड़ी में लखनऊ में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रदेश कार्यालय में भी आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को अपनाने का संकल्प लिया।

प्रदेश अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह ने कहा:
“बाबा साहब केवल संविधान निर्माता नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक पुनर्जागरण के महान नायक थे। उन्होंने जिन मूल्यों—समानता, न्याय और मानव गरिमा—की नींव रखी, वही आज हमारे लोकतंत्र की असली ताकत है। हमें उनके आदर्शों को सिर्फ याद नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में उतारना होगा।”
महासचिव कामिनी शर्मा ने कहा:
“डॉ. आंबेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और संघर्ष के बल पर बदलाव लाया जा सकता है। वे हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा हैं, जो समाज में बराबरी और सम्मान चाहता है। बाबा साहब का सपना तभी पूरा होगा, जब हर नागरिक को न्याय और अवसर समान रूप से मिले।”

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