
दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ‘विश्व के शांतिदूत’ की भूमिका निभाने का दावा किया है। इस बार उन्होंने खुद को भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित न्यूक्लियर युद्ध को टालने का हीरो बताया है।
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जी हां, ट्रंप साहब का कहना है – “हमारे पास दो महान नेता हैं… वे एक बड़ी लड़ाई के बीच में थे… और हमने सब संभाल लिया!”
अब चाहे अमेरिकी मीडिया इस बयान पर चाय गिरा दे या भारतीय MEA ठहाके लगा दे, ट्रंप अपने अंदाज में ठहरे ‘सत्य के ब्रांड एंबेसडर’।
न्यूक्लियर नेशन हैं भैया!
ट्रंप ने प्रेस वार्ता में जोर देकर कहा – “भारत और पाकिस्तान दोनों न्यूक्लियर नेशन हैं, और बहुत पावरफुल हैं। हमने उन्हें रोका वरना बुरा हो जाता।”
हालांकि भारत की ओर से फिर से साफ कर दिया गया है कि संघर्ष विराम पूरी तरह द्विपक्षीय प्रयासों का नतीजा था, न कि किसी व्हाइट हाउस वार्तालाप का।

पाकिस्तान बोला – शुक्रिया ट्रंप साहब!
जहां भारत ने ट्रंप की भूमिका पर एकदम साफ ‘ना’ कहा, वहीं पाकिस्तान ने एक बार फिर “Thank you Trump Bhai” दोहराया है। शायद अब इमरान खान की जगह अगले चुनाव में ट्रंप को पाकिस्तान से टिकट भी ऑफर कर दिया जाए!
ट्रंप का अगला मिशन – इसराइल-ईरान और मून बनाम मंगल
ट्रंप बोले – “हम इसराइल-ईरान और डीआर कांगो-रवांडा के बीच भी शांति ला चुके हैं… और आने वाले सालों में और भी करेंगे।”
सूत्रों की मानें तो ट्रंप का अगला मिशन है – “सूरज और चांद के बीच जलवायु संघर्ष खत्म कराना”।
डोनाल्ड ट्रंप जब भी माइक पकड़ते हैं, कहीं न कहीं कोई शांति ज़रूर भंग हो जाती है – या फिर स्थापित हो जाती है, कम से कम उनकी सोच में।
भारत और पाकिस्तान की जटिल कूटनीति में जब भी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति खुद को शांति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हैं, तो साउथ एशिया थोड़ा मुस्कुरा जरूर देता है।
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