ओटीटी के बढ़ते प्रभाव से युवाओं में अकेलापन, खान-पान और जीवनशैली में भी बदलाव : शोध

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के शोधार्थी सागर कनौजिया ने पीएचडी वाइवा में प्रस्तुत किए निष्कर्ष

झाँसी। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का बढ़ता उपयोग युवाओं के सामाजिक व्यवहार, खान-पान और जीवनशैली को प्रभावित कर रहा है। अत्यधिक उपयोग से युवाओं में एकाकीपन बढ़ने के साथ ही उनकी सांस्कृतिक आदतों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। यह निष्कर्ष बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भास्कर जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के शोधार्थी सागर कनौजिया ने अपनी पीएचडी की अंतिम मौखिक परीक्षा के दौरान प्रस्तुत किए।


शोधार्थी सागर कनौजिया ने डॉ. कौशल त्रिपाठी के निर्देशन में ‘ओवर द टॉप (ओटीटी) वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन’ विषय पर शोध कार्य किया। उन्होंने बताया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री युवाओं की सोच, सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक व्यवहार को प्रभावित कर रही है। विशेष रूप से अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण युवाओं में अकेलेपन की प्रवृत्ति बढ़ने तथा खान-पान, रहन-सहन और जीवनशैली में सांस्कृतिक परिवर्तन के संकेत मिले हैं।


अंतिम मौखिक परीक्षा में बाह्य परीक्षक के रूप में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के जनसंचार विभाग की वरिष्ठ आचार्य प्रो. तनु डंग उपस्थित रहीं। उन्होंने शोध के विभिन्न पहलुओं पर अकादमिक चर्चा की। इस दौरान ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभावों तथा युवाओं के बदलते व्यवहार पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने शोध विषय की समसामयिक प्रासंगिकता और निष्कर्षों की सराहना की।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कला संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीत बिसारिया, डॉ. नवीन चंद पटेल, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. राघवेंद्र दीक्षित, डॉ. नितिन भगोरिया, डॉ. अभिषेक कुमार, अतीत विजय एवं वीरेंद्र अहिरवार सहित संस्थान के शिक्षक एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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