उत्तर कोरिया: उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए पनडुब्बियों से दागी जाने के लिए तैयार की गई क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, बुधवार को देश के पूर्वी जलक्षेत्र में दो प्रकार की मिसाइलों का परीक्षण किया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ उत्तर कोरिया का कूटनीतिक गतिरोध लंबे समय से जारी है। इन परीक्षणों को अपनी नौसैनिक ताकत और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दिशा में किम जोंग उन के प्रयासों के तौर पर देखा जा रहा है।
मिसाइलों को बताया रणनीतिक, लॉन्च के तरीके पर स्थिति स्पष्ट नहीं
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने गुरुवार को बताया कि परीक्षण के दौरान दो प्रकार की क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इन हथियारों को रणनीतिक बताया गया है, जो परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता का संकेत देता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मिसाइलें वास्तविक पनडुब्बी से दागी गई थीं या पानी के नीचे मौजूद किसी परीक्षण मंच से। दक्षिण कोरिया की सेना की ओर से परीक्षण को लेकर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई।
पानी के नीचे युद्ध करने की क्षमता परखना था मकसद
उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, परीक्षण का उद्देश्य पानी के नीचे इस्तेमाल होने वाली युद्ध प्रणालियों की तैयारी का आकलन करना था। इसके साथ ही नौसेना की रणनीतिक अभियानों को अंजाम देने की क्षमता में सुधार और देश की परमाणु प्रतिरोधक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रदर्शित करना भी इसका लक्ष्य बताया गया। पनडुब्बी से मिसाइल दागने की क्षमता किसी देश की सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि पानी के नीचे से हमले की स्थिति में मिसाइल के संभावित प्रक्षेपण स्थल का पता लगाना और जवाबी कार्रवाई करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हाइपरसोनिक मिसाइलों के परीक्षण के बाद नई गतिविधि
उत्तर कोरिया हाल के दिनों में लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहा है। इससे पहले 20 सितंबर और 3 अक्टूबर को कई हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण किए गए थे। उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि इन हथियारों का उद्देश्य अपने सैन्य भंडार को मजबूत करना और दक्षिण कोरिया तथा जापान की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने की क्षमता विकसित करना है। नए क्रूज मिसाइल परीक्षण को भी इसी सिलसिले की अगली कड़ी माना जा रहा है।
नए युद्धपोत और सैन्य अभ्यास पर भी जोर
उत्तर कोरिया ने हाल के हफ्तों में सैन्य अभ्यास किए हैं और अपने बेड़े में एक नया युद्धपोत भी शामिल किया है। देश के नेता किम जोंग उन लगातार अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम और सैन्य तैयारियों को प्रदर्शित कर रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका और दक्षिण कोरिया की ओर से लंबे समय से रुकी कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू करने के प्रस्तावों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं मिले हैं।
दक्षिण कोरिया से बातचीत बंद, अमेरिका के साथ भी गतिरोध
किम जोंग उन ने हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया के साथ कूटनीतिक संपर्क और सहयोग रोक दिया है। उत्तर कोरिया ने अपने पड़ोसी को स्थायी शत्रु के रूप में पेश किया है। वहीं, अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत भी वर्षों से ठप पड़ी है। किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 2019 में टूटी बातचीत को दोबारा शुरू करने की अपील को अब तक स्वीकार नहीं किया है।
उत्तर कोरिया का कहना है कि अमेरिका को उसके प्रति कथित शत्रुतापूर्ण नीति छोड़नी चाहिए और बातचीत शुरू करने के लिए परमाणु निरस्त्रीकरण को पूर्व शर्त नहीं बनाना चाहिए। ऐसे में नए मिसाइल परीक्षण से क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और अमेरिका-दक्षिण कोरिया के साथ तनाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
