लखनऊ: फैजुल्लागंज में कई दिनों से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कई घरों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चूल्हे बंद हैं, राशन खत्म होने लगा है और लोग अपने ही घरों में कैद होकर रहने को मजबूर हैं। ऐसे हालात के बीच 7 अक्टूबर को कांग्रेस के निवर्तमान प्रदेश महासचिव और पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने मेयर सुषमा खर्कवाल की कथित गैरमौजूदगी और प्रभावित लोगों के बीच नहीं पहुंचने को लेकर सवाल उठाए थे। इसके अगले ही दिन 8 अक्टूबर को मेयर अधिकारियों के साथ फैजुल्लागंज पहुंचीं।
सवाल उठने के बाद पहुंचीं मेयर
मेयर के मौके पर पहुंचने को सामान्य निरीक्षण मानकर बात खत्म की जा सकती है, लेकिन मौजूदा हालात में इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है। क्या जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच पहुंचने के लिए पहले सवाल उठने का इंतजार करना चाहिए?
फैजुल्लागंज में लोग कई दिनों से पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के बीच जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और राहत कार्यों की निगरानी को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।
अधिकारी पहले से कर रहे थे राहत कार्यों की निगरानी
बाढ़ जैसे हालात के बीच नगर आयुक्त और दूसरे अधिकारी लगातार मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे थे। अब मेयर भी अधिकारियों के साथ फैजुल्लागंज पहुंचीं और मौके की स्थिति का जायजा लिया।
मौके पर पहुंचना निश्चित तौर पर राहत कार्यों के लिहाज से जरूरी कदम है, लेकिन सवाल यह है कि संकट के समय चुने हुए जनप्रतिनिधि की मौजूदगी कितनी नियमित और प्रभावी होनी चाहिए।
जनता के सवाल और जवाबदेही दोनों जरूरी
लोकतंत्र में सवाल पूछना भी जरूरी है और जवाब मांगना भी। जनप्रतिनिधियों से यह उम्मीद की जाती है कि संकट की घड़ी में वे जनता के बीच मौजूद रहें और उनकी समस्याओं को मौके पर समझें।
फैजुल्लागंज के लोगों को सिर्फ निरीक्षण या तस्वीरों से राहत नहीं मिलेगी। उन्हें घरों से पानी निकलने, राशन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जरूरत है। लोगों को यह भरोसा भी चाहिए कि मुश्किल वक्त में उनका चुना हुआ नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।
फैजुल्लागंज को लगातार राहत की जरूरत
फैजुल्लागंज के मौजूदा हालात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राहत कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं और लोगों को कब तक जलभराव से राहत मिलती है। इलाके के लोगों को सिर्फ बयान नहीं, बल्कि पानी से बाहर निकलने का रास्ता चाहिए।
जिस ट्रिपल इंजन सरकार की बात कही जाती है, उसी लखनऊ में जनता इस समय सरकार, अव्यवस्था और बाढ़ का ट्रिपल दर्द झेल रही है। ऐसे में अब सवाल उठने के बाद जवाबदेही भी जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।
