BSP का संसद में प्रतिनिधित्व खत्म होने की ओर, विधानसभा में भी कोई विधायक नहीं; क्या मायावती की पार्टी से छिन सकता है राष्ट्रीय दल का दर्जा?

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सामने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। लोकसभा में पार्टी का कोई सांसद पहले से नहीं है और उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी अब BSP का एक भी विधायक नहीं है। वहीं, राज्यसभा में मौजूद पार्टी के एकमात्र सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म होने वाला है। इसके बाद संसद के दोनों सदनों में BSP का कोई प्रतिनिधि नहीं रहेगा।

हालांकि, राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा तुरंत खत्म होने की बात नहीं कही जा सकती। चुनाव आयोग के मौजूदा रिकॉर्ड में BSP राष्ट्रीय पार्टी के रूप में दर्ज है। किसी पार्टी की मान्यता और उसका दर्जा चुनावी प्रदर्शन तथा निर्धारित कानूनी मानदंडों के आधार पर तय होता है।

राज्यसभा में भी खत्म हो जाएगा BSP का प्रतिनिधित्व

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो चुका है। इनमें BSP के इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम की सीट भी शामिल है। उनका छह साल का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में BSP के पास राज्यसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। ऐसे में चुनाव के बाद पार्टी के राज्यसभा में लौटने की स्थिति नहीं बनती। उपलब्ध राजनीतिक समीकरण के मुताबिक इन 10 सीटों में बीजेपी के आठ और समाजवादी पार्टी के दो सीटें जीतने की स्थिति में होने की बात कही गई है।

यूपी विधानसभा में भी BSP का खाता खाली

BSP की मुश्किल सिर्फ संसद तक सीमित नहीं है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में अब पार्टी का कोई विधायक नहीं है। अगस्त में बलिया की रसड़ा सीट से तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में BSP का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया।

इस तरह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने विधानसभा और संसद, दोनों स्तरों पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व वापस हासिल करने की चुनौती है।

2012 के बाद लगातार कमजोर हुआ विधानसभा में प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2012 को BSP के राजनीतिक प्रदर्शन में बड़े बदलाव के दौर के तौर पर देखा जाता है। 2007 के चुनाव में पार्टी ने 403 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था और मायावती चौथी बार मुख्यमंत्री बनी थीं।

लेकिन 2012 के चुनाव में BSP की सीटों की संख्या घटकर 80 रह गई और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद विधानसभा में पार्टी का प्रदर्शन लगातार कमजोर होता गया।

2014 में लोकसभा में नहीं मिली एक भी सीट

राष्ट्रीय स्तर पर भी BSP के प्रदर्शन में बड़ा बदलाव 2014 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। 2009 के चुनाव में BSP ने 21 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 6.17 प्रतिशत था।

2014 में पार्टी एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी। हालांकि, उसे 4.19 प्रतिशत वोट मिले। उत्तर प्रदेश में उस चुनाव में बीजेपी ने 80 में से 71 लोकसभा सीटें जीती थीं। उस समय दलित वोटों के BSP से बीजेपी की ओर जाने की चर्चा भी हुई थी।

2019 में मिली वापसी, 2024 में फिर नहीं खुला खाता

2019 के लोकसभा चुनाव में BSP ने समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में BSP ने 10 सीटें जीतीं और उसका वोट शेयर 3.67 प्रतिशत रहा।

इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में BSP ने बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA और कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन, दोनों से अलग चुनाव लड़ा। इस चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसका वोट शेयर घटकर 2.06 प्रतिशत रह गया।

दलित वोट बैंक को लेकर भी चुनौती

पार्टी के लगातार कमजोर होते चुनावी प्रदर्शन के बीच उसके पारंपरिक वोट बैंक को लेकर भी चर्चा है। खास तौर पर अनुसूचित जाति के वोट और जाटव समुदाय के समर्थन को BSP का पारंपरिक आधार माना जाता रहा है।

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले SC वोटों को लेकर बीजेपी, समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) समेत कई दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21 प्रतिशत मानी जाती है और इनमें जाटव समुदाय की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान दिया जाता है।

राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे पर क्या है नियम?

BSP के राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए निर्धारित मानदंडों में से कम से कम एक पूरा करना होता है।

इनमें प्रमुख शर्तें हैं:

  • पिछले लोकसभा चुनाव में कम से कम चार राज्यों में कुल वैध वोटों का 6 प्रतिशत हासिल करना और कम से कम चार लोकसभा सांसद होना।
  • लोकसभा की कम से कम 2 प्रतिशत सीटें जीतना और ये सांसद कम से कम तीन राज्यों से निर्वाचित होना।
  • कम से कम चार राज्यों में मान्यता प्राप्त राज्य पार्टी होना।

इसलिए BSP के राष्ट्रीय दर्जे पर अंतिम स्थिति चुनाव आयोग द्वारा संबंधित चुनावी आंकड़ों और लागू नियमों के आधार पर तय होगी। फिलहाल चुनाव आयोग की उपलब्ध सूची में BSP राष्ट्रीय पार्टी के रूप में दर्ज है।

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