सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को सिलीगुड़ी में एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकेन नेक की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और गोरखा मुद्दे के स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया। अमित शाह ने गोरखा नेताओं और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ बैठक के बाद इस मुद्दे के समाधान के लिए एक समिति गठित करने पर सहमति बनाई। समिति संविधान के दायरे में स्थायी समाधान का खाका तैयार करेगी।
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद उन्होंने राज्य के पर्वतीय इलाकों के नेताओं से मुलाकात की। बैठक में दार्जिलिंग पहाड़ियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और गोरखा पहचान से जुड़े मुद्दों के संवैधानिक ढांचे के भीतर स्थायी राजनीतिक समाधान पर चर्चा हुई।
चार दशक से जारी है पहाड़ी समुदायों का संघर्ष
बैठक के बाद दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिस्टा ने कहा कि पहाड़ी समुदायों का संघर्ष चार दशकों से अधिक पुराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने पहाड़ी लोगों की आकांक्षाओं को दबाया। उनके मुताबिक, बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताओं और अपेक्षाओं को गृह मंत्री के सामने रखा।
गोरखा मुद्दे पर समिति बनाने पर बनी सहमति
अमित शाह, गोरखा नेताओं और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच हुई बैठक में समिति गठित करने पर सहमति बनी। केंद्र सरकार ने भरोसा दिया कि वह इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे का जल्द समाधान चाहती है। समिति दार्जिलिंग पहाड़ियों में गोरखा पहचान से जुड़े मुद्दे के स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में काम करेगी और अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करेगी।
पूर्व BSF महानिदेशक पंकज कुमार सिंह करेंगे नेतृत्व
अधिकारियों के मुताबिक, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पूर्व सीमा सुरक्षा बल महानिदेशक पंकज कुमार सिंह समिति का नेतृत्व करेंगे। दार्जिलिंग के सुकना में हुई इस बैठक का उद्देश्य पहाड़ी लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और उन्हें संविधान के दायरे में मान्यता देने के लिए समाधान का रोडमैप तैयार करना था।
बैठक की अध्यक्षता अमित शाह ने की। इसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अलावा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख बिमल गुरुंग, वरिष्ठ नेता रोशन गिरि और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट प्रमुख मान घिसिंग भी शामिल हुए।
सरकार की ओर से वार्ताकार की भूमिका में हैं पंकज सिंह
पंकज कुमार सिंह इस मुद्दे पर सरकार की ओर से वार्ताकार की भूमिका निभा रहे हैं। वह 2023 से 2025 तक देश के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी रह चुके हैं। समिति पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के लिए संविधान के तहत अंतिम समझौते का खाका तैयार करेगी। अधिकारियों के अनुसार, सिंह की भूमिका राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने और गोरखा समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान पर केंद्रित रहेगी।
क्या है गोरखालैंड की मांग का पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाला नेपाली भाषी गोरखा समुदाय लंबे समय से अलग राज्य गोरखालैंड की मांग करता रहा है। समुदाय का कहना है कि पश्चिम बंगाल में उसकी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान की अनदेखी होती रही है। इसी वजह से दार्जिलिंग और आसपास का पहाड़ी क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक आंदोलनों का केंद्र रहा है।
1980 के दशक में सुभाष घिसींग के नेतृत्व में गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। इसके बाद 1988 में दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल का गठन हुआ। बाद में बिमल गुरुंग के नेतृत्व में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने गोरखालैंड की मांग को लेकर आंदोलन किया। फिलहाल क्षेत्र में गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के रूप में एक व्यवस्था लागू है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अलग राज्य की मांग अब भी कायम है।
