नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) और बलूचिस्तान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच यूक्रेन में भारत के पूर्व राजदूत विद्या भूषण सोनी ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की है। उनका कहना है कि आर्थिक संकट, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित समर्थन न मिलना और कूटनीतिक मोर्चे पर लगातार झटकों के कारण पाकिस्तान के भीतर सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे बन गए हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में लोग खुलकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
अमेरिका-ईरान समीकरण से उम्मीदें टूटीं, बढ़ी निराशा
विद्या भूषण सोनी ने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन और आर्थिक सहायता हासिल कर सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उनके मुताबिक, अपेक्षित आर्थिक मदद नहीं मिलने से देश के भीतर निराशा और असंतोष का माहौल गहराया है, जिसका असर अब सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के रूप में दिखाई दे रहा है।
‘पाकिस्तान अपने ही घर में घिर चुका है’
पूर्व राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान सरकार का विरोध करने वाले कई समूह, जिनमें बलूच संगठन और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के लोग भी शामिल हैं, अब खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान दुनिया के सामने खुद को शांतिपूर्ण देश के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आंतरिक हालात इसके विपरीत हैं। उनका कहना है कि लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है और सरकार पर दबाव बनाने के लिए वे सड़कों पर उतर रहे हैं।
‘पहले अपने नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान दे पाकिस्तान’
विद्या भूषण सोनी ने कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में सक्रिय भूमिका निभाने से पहले अपने नागरिकों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सरकार अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव नहीं करती है तो विरोध प्रदर्शनों के बीच अपने ही नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता अपना सकती है।
JKAAC ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
इस बीच जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKAAC) ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि घायलों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया और पुलिस के साथ सादे कपड़ों में नकाबपोश लोग भी मौजूद थे। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान आम लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
CCTV कैमरे तोड़ने और स्वतंत्र जांच की उठाई मांग
JKAAC ने दावा किया कि कई स्थानों पर निगरानी के लिए लगे CCTV कैमरों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे पारदर्शिता और सबूतों के संरक्षण पर सवाल खड़े होते हैं। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मीडिया, विभिन्न देशों के राजनयिक मिशनों और मानवाधिकार संगठनों से हालिया घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। साथ ही पाकिस्तान प्रशासित जम्मू-कश्मीर में हुई घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच कराने की मांग भी दोहराई है।
