जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की उरई नगर पालिका परिषद में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के दौरान उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब जांच कर रहे आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) राम अचल कुरील के बीच अभिलेखों को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों अधिकारियों के बीच हुई बहस का मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच के दौरान दस्तावेज उपलब्ध कराने और जांच के अधिकार को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
अभिलेख नहीं मिलने पर जताई नाराजगी
आईएएस रिंकू सिंह राही ने कहा कि जिन दस्तावेजों की पहले से मांग की गई थी, वे जांच के समय उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं, अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील का कहना था कि जांच अधिकारी बदल चुके हैं और संबंधित अभिलेख सक्षम अधिकारी को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इसी दौरान सोशल मीडिया पर वायरल कुछ पत्रों को लेकर भी चर्चा हुई, लेकिन किसी निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी। कुछ देर बाद EO मौके से चले गए, जबकि जांच की कार्रवाई जारी रही।
सभासदों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
उरई नगर पालिका परिषद के भाजपा सभासदों ने नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने पूरे मामले की जांच आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही से कराने की मांग की थी। उस समय रिंकू सिंह राही जालौन में एसडीएम के पद पर तैनात थे। बाद में उनका तबादला एसडीएम न्यायिक उरई के पद पर किया गया और उन्हें इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
कार्रवाई की चेतावनी वाला पत्र भी हुआ था वायरल
जांच से पहले आईएएस रिंकू सिंह राही ने नगर पालिका प्रशासन को अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए पत्र जारी किया था। उन्होंने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया था। पत्र में कहा गया था कि यदि तय समय तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए तो 29 जुलाई को नगर पालिका पहुंचकर अभिलेख जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित तिथि पर जब वह नगर पालिका पहुंचे तो कई कार्यालयों के कमरे बंद मिले।
10 जून की शिकायत से शुरू हुआ पूरा विवाद
पूरा मामला 10 जून से शुरू हुआ, जब नगर पालिका के एक दर्जन से अधिक सभासदों ने अधिशासी अधिकारी पर भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायत सौंपी थी। कार्रवाई नहीं होने पर सभासदों ने सामूहिक इस्तीफा देने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद 20 जून को दोबारा शिकायत देकर निविदाओं, आउटसोर्सिंग एजेंसियों और भुगतान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई। इसी शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी ने जांच की जिम्मेदारी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही को सौंपी।
जांच के अधिकार को लेकर आमने-सामने आए दोनों अधिकारी
जांच के दौरान अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील ने कहा कि संबंधित अभिलेख जांच समिति के अध्यक्ष को पहले ही उपलब्ध करा दिए गए हैं। वहीं, रिंकू सिंह राही ने कहा कि यदि जिलाधिकारी की ओर से जांच अधिकारी बदले जाने का कोई आदेश जारी हुआ है तो उसे प्रस्तुत किया जाए। इसी दौरान दोनों अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। बहस के दौरान रिंकू सिंह राही ने EO से यह भी कहा कि वह उनसे मिलने नहीं बल्कि “सेटिंग” करने आए थे। इसके बाद उन्होंने उपलब्ध दस्तावेजों की जांच जारी रखी।
कई शाखाओं के रिकॉर्ड की हुई जांच, कई कार्यालय मिले बंद
जांच के दौरान रिंकू सिंह राही ने नगर पालिका के विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण किया। दस्तावेजों की स्कैनिंग कराई गई और कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई। जन्म प्रमाण पत्र शाखा, लेखा अनुभाग, कर अनुभाग सहित अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया। हालांकि प्रकाश विभाग, नजूल शाखा, निर्माण विभाग और सफाई निरीक्षक कार्यालय बंद मिले। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए कि जांच के दौरान कई कमरों पर ताले क्यों लगे थे और संबंधित कर्मचारी मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे।
करीब तीन घंटे तक चली जांच प्रक्रिया
दोपहर करीब दो बजे शुरू हुई जांच लगभग तीन घंटे तक चली। इस दौरान अधिशासी अधिकारी कुछ समय तक मौके पर मौजूद रहे, लेकिन बाद में अभिलेख उपलब्ध न होने की बात कहकर वहां से चले गए। इसके बावजूद जांच टीम ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अपनी कार्रवाई जारी रखी।
रिंकू सिंह राही ने बताया जांच का उद्देश्य
मीडिया से बातचीत में आईएएस रिंकू सिंह राही ने कहा कि उनका उद्देश्य जांच से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेख एकत्र करना है। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जिन दस्तावेजों की मांग की गई थी, उनका निरीक्षण और फोटोग्राफी की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में उन्हें यह जांच सौंपी गई है और उसी जिम्मेदारी के तहत नगर पालिका परिषद में कार्रवाई की जा रही है।
