सत्ता नहीं, संगठन से बनाई पहचान! राजनाथ सिंह और उनके बेटों पंकज-नीरज की राजनीतिक यात्रा क्यों बनी मिसाल?

स्तंभ (ज़ीशान हैदर): उत्तर प्रदेश भाजपा में हाल ही में हुए संगठनात्मक फेरबदल के बाद केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर परिवारवाद और संगठन आधारित राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। किसी भी बड़े राजनीतिक परिवार के सदस्य को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या यह केवल राजनीतिक विरासत का विस्तार है या फिर लंबे संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ता जीवन का परिणाम?

राजनाथ सिंह, उनके बड़े बेटे पंकज सिंह और छोटे बेटे नीरज सिंह की राजनीतिक यात्राओं पर नजर डालने से एक समानता स्पष्ट दिखाई देती है। तीनों की सक्रिय राजनीतिक भूमिका की शुरुआत संगठन और कार्यकर्ता जीवन से हुई। वर्षों तक संगठन में काम करने के बाद ही उन्हें क्रमशः बड़ी जिम्मेदारियां मिलीं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश भाजपा के हालिया संगठनात्मक बदलाव के बाद यह परिवार एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है।

गांव के शिक्षक से देश के रक्षा मंत्री बनने तक का सफर

राजनाथ सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के एक किसान परिवार में हुआ। उन्होंने भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त करने के बाद मिर्जापुर में व्याख्याता के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। छात्र जीवन से ही उनका झुकाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर रहा, जिसने आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की दिशा तय की।

इसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंघ के माध्यम से सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संगठन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान उन्हें भी जेल जाना पड़ा। उस दौर में न भाजपा अस्तित्व में थी और न ही विपक्षी दलों के पास आज जैसी राजनीतिक ताकत थी। आपातकाल का संघर्ष उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

आपातकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 1977 में वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश सचिव, प्रदेश अध्यक्ष, दो बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य, लोकसभा सांसद, केंद्रीय कृषि मंत्री, सड़क परिवहन मंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और वर्तमान में देश के रक्षा मंत्री जैसी अनेक जिम्मेदारियां संभालीं। संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर लंबे अनुभव के कारण उन्हें भाजपा के सबसे अनुभवी नेताओं में गिना जाता है।

संगठन पहले, पद बाद में… यही रही कार्यशैली

राजनाथ सिंह की राजनीतिक यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता संगठन आधारित राजनीति रही है। बूथ स्तर से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक उन्होंने संगठन को मजबूत करने का काम किया। हैदरगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान जमीनी स्तर पर चुनाव संचालन से लेकर लखनऊ के लालबाग स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में वर्षों तक संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने कार्यकर्ता संस्कृति को प्राथमिकता दी। लंबे समय तक संगठन के बीच सक्रिय रहने के बाद ही वे प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचे।

राजनाथ सिंह दो बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। इसके बावजूद उनके परिवार के सदस्यों को राजनीति में आते ही विधायक, सांसद या मंत्री जैसे पद नहीं मिले। पहले संगठन में कार्यकर्ता के रूप में काम किया गया, उसके बाद ही क्रमशः संगठनात्मक और चुनावी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। यही कारण है कि इस परिवार की राजनीतिक कार्यशैली अक्सर चर्चा का विषय बनती रही है।

देश के प्रमुख राजनीतिक परिवारों में गिने जाने के बावजूद इस परिवार की राजनीतिक यात्रा का एक अलग पक्ष यह भी माना जाता है कि यहां सक्रिय राजनीति में आने के बाद सीधे बड़े संवैधानिक या चुनावी पद नहीं मिले। पहले संगठन में लंबे समय तक कार्य किया गया और उसके बाद जिम्मेदारियां बढ़ती गईं।

पंकज सिंह की राजनीति: पहले कार्यकर्ता, फिर संगठन और उसके बाद विधानसभा

राजनाथ सिंह के बड़े बेटे पंकज सिंह ने भी सक्रिय राजनीति में आते ही कोई चुनावी पद प्राप्त नहीं किया। उन्होंने लगभग एक दशक तक भाजपा में जमीनी कार्यकर्ता के रूप में काम किया। इस दौरान संगठन के विभिन्न अभियानों, कार्यक्रमों और पार्टी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। लंबे समय तक कार्यकर्ता के रूप में काम करने के बाद उन्हें संगठन में जिम्मेदारियां मिलीं और वे प्रदेश मंत्री, प्रदेश महासचिव तथा प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे।

संगठन में वर्षों तक सक्रिय भूमिका निभाने के बाद वर्ष 2017 में भाजपा ने पहली बार उन्हें नोएडा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीत दर्ज करते हुए विधानसभा में प्रवेश किया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार नोएडा सीट से रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीत हासिल की।

विधायक के रूप में पंकज सिंह ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सड़क संपर्क, शहरी आधारभूत ढांचे के विकास और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। आज उनकी पहचान केवल राजनाथ सिंह के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि नोएडा के सक्रिय जनप्रतिनिधि और संगठन से निकले नेता के रूप में भी स्थापित हो चुकी है।

नीरज सिंह: संगठन में लंबे सफर के बाद मिली प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी

राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह लंबे समय तक संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उन्होंने भाजपा के सदस्यता अभियान, बूथ प्रबंधन, चुनावी रणनीति, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और विभिन्न संगठनात्मक कार्यक्रमों में लगातार भागीदारी निभाई। हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, जिसे संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद मिली अब तक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की संगठनात्मक कार्यप्रणाली में प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी तक पहुंचने से पहले कार्यकर्ताओं को विभिन्न स्तरों पर लंबे समय तक काम करना पड़ता है। नीरज सिंह की राजनीतिक यात्रा को भी इसी क्रम में देखा जा रहा है, जहां संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्हें प्रदेश नेतृत्व में स्थान मिला।

परिवारवाद की बहस आखिर क्यों उठती है?

भारतीय राजनीति में जब भी किसी वरिष्ठ नेता के परिवार का कोई सदस्य सक्रिय राजनीति या संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, तब परिवारवाद की बहस शुरू होना स्वाभाविक माना जाता है। लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों में ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहां एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी राजनीति में सक्रिय होती है।

राजनाथ सिंह के परिवार को लेकर भी समय-समय पर ऐसे सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस परिवार की राजनीतिक यात्रा का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट दिखाई देता है कि राजनाथ सिंह ने छात्र राजनीति और संगठन से शुरुआत कर राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर तय किया। पंकज सिंह ने भी वर्षों तक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में काम करने और संगठन में जिम्मेदारियां निभाने के बाद चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। वहीं नीरज सिंह भी लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहने के बाद प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी तक पहुंचे।

अन्य राजनीतिक परिवारों से अलग क्यों मानी जाती है यह कार्यशैली?

देश की राजनीति में कई ऐसे उदाहरण रहे हैं, जहां बड़े राजनीतिक परिवारों के सदस्यों को सार्वजनिक जीवन में आते ही विधायक, सांसद, मंत्री या अन्य संवैधानिक पदों की जिम्मेदारी मिल गई। इसके विपरीत राजनाथ सिंह के परिवार की राजनीतिक यात्रा में संगठन के भीतर कार्यकर्ता के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहने का क्रम स्पष्ट दिखाई देता है।

राजनाथ सिंह स्वयं दो बार भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और लंबे समय तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहे। इसके बावजूद उनके दोनों बेटों की राजनीतिक यात्रा सीधे किसी बड़े संवैधानिक या चुनावी पद से शुरू नहीं हुई। पहले संगठन में कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई गई, फिर संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलीं और उसके बाद राजनीतिक भूमिका का विस्तार हुआ। यही पहलू इस परिवार की राजनीतिक कार्यशैली को अलग पहचान देता है।

 

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