नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक टैंकर पर अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद विवाद गहरा गया है। भारत की कड़ी आपत्ति और राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराने के बीच अब अमेरिका ने इस पूरे मामले में अपनी सफाई पेश की है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि कार्रवाई से पहले संबंधित जहाज को दर्जनों बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
इस घटना में टैंकर पर सवार 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि इंजन रूम में आग लगने के कारण आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश की मौत हो गई।
अमेरिका का दावा- 60 से ज्यादा बार दी गई चेतावनी
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जिस टैंकर को निशाना बनाया गया वह कथित तौर पर ईरान के तथाकथित “शेडो फ्लीट” का हिस्सा था। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज प्रतिबंधों को दरकिनार कर ईरानी कच्चे तेल की ढुलाई में शामिल था।
अमेरिकी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई से पहले जहाज को 60 से अधिक मौखिक चेतावनियां दी गई थीं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो सप्ताह से लगातार इस जहाज को चेतावनी संदेश भेजे जा रहे थे।
बताया गया कि 9 जून की रात जहाज की पहचान होने के बाद अमेरिकी सैन्य विमानों ने उसे रोके जाने के निर्देश दिए। इसके बावजूद जहाज के नहीं रुकने पर कार्रवाई की गई।
हमले से पहले इंजन रूम खाली करने को कहा गया
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, पहले चेतावनी स्वरूप फायरिंग की गई। इसके बाद हमले से लगभग 15 मिनट पहले क्रू को इंजन रूम खाली करने का निर्देश भी दिया गया था।
अमेरिका का दावा है कि जब जहाज ने निर्देशों का पालन नहीं किया, तब विमान से उसके इंजन रूम को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि क्षेत्र में लागू नाकेबंदी को सख्ती से लागू किया जा रहा था और इस संबंध में पहले से स्पष्ट चेतावनियां जारी की गई थीं।
भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भारत सरकार ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित अमेरिकी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।
इसके साथ ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर भारत की नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस प्रकार की घातक सैन्य कार्रवाई स्वीकार्य नहीं मानी जा सकती।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
घटना के बाद देश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भी पर्याप्त जवाब नहीं दिया गया। इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी नेताओं ने भी केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।
घटना पर बनी हुई है नजर
तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मामले में सभी तथ्यों की जानकारी जुटा रही है।
