
महाराष्ट्र में इंसानों और बंदरों के बीच बढ़ते संघर्ष को देखते हुए राज्य सरकार ने नई योजना शुरू की है। अब अगर कोई व्यक्ति किसी बंदर को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ता है, तो उसे हर बंदर पर ₹600 इनाम दिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम गांवों और शहरों में बंदरों के बढ़ते हमलों, फसलों के नुकसान और सार्वजनिक जगहों पर दहशत को कम करने के लिए उठाया गया है।
क्यों जरूरी हुई यह पहल?
पिछले कुछ समय में महाराष्ट्र के कई इलाकों से बंदरों के उत्पात की शिकायतें बढ़ी हैं।
मुख्य समस्याएं:
- किसानों की फसल बर्बाद करना
- घरों और बाजारों में घुसना
- लोगों पर हमला करना
- बच्चों और बुजुर्गों को डराना
- सार्वजनिक जगहों पर अफरा-तफरी फैलाना
वन विभाग का कहना है कि इंसानों द्वारा बंदरों को खाना खिलाने और तेजी से बदलते शहरी माहौल ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।
₹300 से बढ़ाकर ₹600 किया गया इनाम
पहले बंदरों को पकड़ने पर ₹300 दिए जाते थे, लेकिन अब इसे बढ़ाकर ₹600 प्रति बंदर कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इनाम बढ़ने से ज्यादा लोग इस काम में शामिल होंगे और समस्या पर तेजी से नियंत्रण पाया जा सकेगा।
कैसे काम करेगी योजना?
राजस्व और वन विभाग के आदेश के अनुसार यह योजना 22 अप्रैल 2026 से लागू कर दी गई है। प्रक्रिया इस तरह होगी:
- बंदर को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाएगा
- हेल्थ चेकअप कराया जाएगा
- मानव बस्तियों से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा
- पूरी निगरानी वन विभाग करेगा
- काम पूरा होने पर ₹600 इनाम दिया जाएगा
जानवरों की सुरक्षा पर भी फोकस
सरकार ने साफ किया है कि इस योजना में पशु क्रूरता की अनुमति नहीं होगी। बंदरों को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ना और सुरक्षित स्थान पर छोड़ना अनिवार्य होगा।
योजना अगर सही तरीके से लागू हुई तो शहरों और गांवों में बंदरों के आतंक को कम किया जा सकता है। लेकिन साथ ही लोगों को बंदरों को खाना खिलाने जैसी आदतें भी छोड़नी होंगी।
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