
एक कलाकार… जो सालों तक मंच पर बोलता रहा। आज उसी की आवाज़ को सत्ता के मंच से सम्मान मिला। ये सिर्फ अवॉर्ड नहीं… साधना की जीत है।
गोरखपुर का गौरव: जब कला को मिला सम्मान
Prem Nath ‘Prem Paraya’ अब सिर्फ एक नाम नहीं… एक पहचान बन चुके हैं। उन्हें Bharteendu Natya Academy के स्वर्ण जयंती समारोह में सम्मानित किया गया। और सम्मान देने वाली शख्सियत? राज्यपाल Anandiben पटेल। जब कला को राजभवन तक पहुंच मिले… तो वो इतिहास बनती है।
15 में एक: खास क्यों है ये उपलब्धि
पूरे उत्तर प्रदेश से सिर्फ 15 हस्तियों का चयन हुआ। और उनमें गोरखपुर से एक नाम ‘प्रेम पराया’, ये चयन सिर्फ व्यक्ति का नहीं…पूरे शहर की सांस्कृतिक पहचान का सम्मान है। भीड़ में चुना जाना ही असली पहचान बनाता है।
साधना की कहानी: मंच से मिशन तक
प्रेम नाथ ‘प्रेम पराया’ कोई अचानक चमके सितारे नहीं हैं। ये वो नाम हैं जिन्होंने रंगमंच को जिया, समाज से जोड़ा, कला को विचार बनाया। उनकी हर प्रस्तुति…सिर्फ अभिनय नहीं, एक संदेश होती है। सच्चा कलाकार तालियों के लिए नहीं… असर के लिए काम करता है।
स्वर्ण जयंती समारोह: संस्कृति का उत्सव
Bharteendu Natya Academy के 50 साल पूरे होने पर ये आयोजन हुआ। यहां सिर्फ सम्मान नहीं दिया गया…कला की विरासत को सलाम किया गया। प्रदेश भर से साहित्य, रंगमंच और संस्कृति से जुड़े दिग्गज मौजूद रहे। जब परंपरा और वर्तमान मिलते हैं… तब भविष्य बनता है।

गोरखपुर की पहचान: स्थानीय से प्रदेश तक
ये सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं। यह गोरखपुर की उस मिट्टी का सम्मान है…जो आज भी कलाकार पैदा करती है। छोटे शहरों में बड़े सपने पलते हैं… और कभी-कभी वो इतिहास लिख देते हैं।
युवाओं के लिए संदेश: प्रेरणा का मंच
प्रेम पराया की उपलब्धि आज के युवा कलाकारों के लिए एक संकेत है अगर साधना सच्ची हो… तो मंच खुद रास्ता बना देता है। टैलेंट को बस समय चाहिए… पहचान खुद चलकर आती है।
आज एक कलाकार सम्मानित हुआ है…लेकिन असल में जीती है कला, संस्कृति और वो जुनून जो बिना शोर के समाज को बदलता है।और गोरखपुर? अब सिर्फ एक शहर नहीं…एक सांस्कृतिक पहचान बनता जा रहा है।
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