
धुले… एक छोटा शहर, लेकिन इस बार यहां से निकली खबर सीधे सरहद पार के कनेक्शन तक जा पहुंची है। ब्यूटी प्रोडक्ट्स की चमक के पीछे छिपा एक काला सच सामने आया है—जहां फेस क्रीम और कॉस्मेटिक्स के डिब्बों में सिर्फ मेकअप नहीं, बल्कि अवैध कारोबार की परतें भरी थीं। पुलिस की एक रेड ने यह साफ कर दिया कि बाजार में बिक रहा हर चमकता प्रोडक्ट भरोसे के लायक नहीं होता।
LCB की रेड: दो दुकानों पर एक साथ छापा
लोकल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (LCB) ने सटीक सूचना के आधार पर धुले शहर में दो अलग-अलग लोकेशनों पर छापेमारी की। जय शंकर मार्केट स्थित श्री साईं ट्रेडर्स। नेशनल हाई स्कूल के पीछे पब्लिक मार्केट की दुकान।
इन दोनों जगहों से कुल ₹61,474 कीमत के कॉस्मेटिक्स जब्त किए गए। पहली नजर में यह सामान्य व्यापार लगा, लेकिन जब पुलिस ने दस्तावेज मांगे— कोई बिल नहीं। कोई इंपोर्ट रिकॉर्ड नहीं। कोई वैध अनुमति नहीं।
यहीं से मामला संदिग्ध से सीधे अवैध कारोबार में बदल गया।
पाकिस्तान कनेक्शन: कैसे पहुंचे ये प्रोडक्ट?
जांच में सामने आया कि जब्त किए गए कई कॉस्मेटिक्स पाकिस्तान में बने हुए थे।
अब सवाल उठता है— जब भारत में ऐसे सामान पर रोक है, तो ये बाजार तक कैसे पहुंचे? पुलिस को शक है कि यह माल गैरकानूनी सप्लाई चैन अनधिकृत आयात नेटवर्क या स्मगलिंग रूट के जरिए देश में लाया गया।
यह सिर्फ एक दुकान का मामला नहीं…बल्कि एक संगठित नेटवर्क की शुरुआती झलक हो सकती है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
पुलिस ने इस मामले में दो व्यापारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है कैलाश देवानंद नानकानी, फजलू रहमान मोहम्मद सलीम अंसारी।
इन पर निम्न कानूनों के तहत कार्रवाई हुई:

- Foreign Trade Act, 1992
- भारतीय न्याय संहिता (BNS)
- Drugs and Cosmetics Act, 1940
यानी मामला सिर्फ अवैध बिक्री नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है।
जांच का अगला चरण: कौन है पीछे?
LCB अब इस पूरे केस की गहराई से जांच कर रही है। सामान कहां से आया? किन रास्तों से भारत में एंट्री हुई? कौन लोग इस सप्लाई चैन में शामिल हैं? डिजिटल और फिजिकल दोनों स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है।
संभावना है कि आने वाले दिनों में और दुकानों पर छापे, और नामों का खुलासा, और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।
सरहद का तनाव और सख्ती का असर
यह मामला सिर्फ कॉस्मेटिक्स तक सीमित नहीं है।
भारत सरकार पहले ही पाकिस्तान से आने वाले सामान पर सख्त प्रतिबंध लगा चुकी है। ऐसे में इस तरह का माल बाजार में मिलना कई बड़े सवाल खड़े करता है:
- क्या निगरानी में कहीं चूक हो रही है?
- क्या ब्लैक मार्केट अब भी सक्रिय है?
- क्या छोटे शहरों को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाया जा रहा है?
यह रेड साफ संकेत देती है कि सरकार की सख्ती अब जमीन पर दिखने लगी है।
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