“रोटी-बेटी-माटी खतरे में!” असम में Modi का कांग्रेस पर सबसे तीखा हमला

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

राजनीति में कभी-कभी भाषण सिर्फ भाषण नहीं होता…वह सीधा आरोप-पत्र बन जाता है। असम की धरती पर आज वही हुआ। मंच पर खड़े थे Narendra Modi और निशाने पर थी Indian National Congress

शब्दों का ताप इतना था कि राजनीतिक माहौल तुरंत गरमा गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों की नीतियों ने “रोटी, बेटी और माटी” तीनों को खतरे में डाल दिया।

राजनीतिक बयानबाजी भारत में नई बात नहीं है, लेकिन जब आरोप सीधे घुसपैठ और जमीन जैसे मुद्दों पर हो, तो सियासत अचानक चुनावी बहस में बदल जाती है।

‘रोटी-बेटी-माटी’ का राजनीतिक शोर

अपने संबोधन में Narendra Modi ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि दशकों तक घुसपैठियों को संरक्षण देने वाली नीतियों ने असम के मूल निवासियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।

प्रधानमंत्री के मुताबिक स्थानीय लोगों को जमीन के कानूनी अधिकार तक नहीं दिए गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी जमीन के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जे होने दिए गए।

राजनीतिक मंचों पर इस तरह के आरोप अक्सर सुनाई देते हैं, लेकिन जब उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान से जोड़ दिया जाए, तो बयान का वजन कई गुना बढ़ जाता है।

असम का जनसांख्यिकीय सवाल

प्रधानमंत्री ने कहा कि घुसपैठ की नीतियों का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। इससे असम का demographic balance भी प्रभावित हुआ। विशेष रूप से Dhubri और Goalpara जिलों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यहां स्थिति कभी बेहद चिंताजनक हो गई थी।

राजनीतिक विश्लेषक रूबी अरुण के मुताबिक असम की राजनीति में जनसांख्यिकी हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

जमीन वापस लेने का अभियान

प्रधानमंत्री ने असम सरकार द्वारा चलाए जा रहे भूमि पुनर्प्राप्ति अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अवैध कब्जों को हटाने का अभियान शुरू किया है।

सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों की जमीन और अधिकारों की रक्षा करना है।

यह मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रहा, बल्कि असम की राजनीतिक बहस का केंद्रीय विषय बन चुका है।

बोडोलैंड की राजनीति

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने Bodoland Territorial Region का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक बोडो समुदाय को सिर्फ वादों में उलझाए रखा।

प्रधानमंत्री के अनुसार जब लोगों ने सत्ता परिवर्तन कर Bharatiya Janata Party को मौका दिया, तब जाकर शांति प्रक्रिया में वास्तविक प्रगति हुई।

सियासत का बड़ा सवाल

भारतीय राजनीति में आरोप और प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं। लेकिन जब भाषण में घुसपैठ, जमीन और पहचान जैसे शब्द एक साथ आ जाएं, तो बहस अचानक राष्ट्रीय विमर्श बन जाती है।

असम की राजनीति फिलहाल इसी मोड़ पर खड़ी है। जहाँ एक तरफ सत्ता का दावा है कि वह स्थानीय पहचान की रक्षा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बताता है। और भारत की लोकतांत्रिक राजनीति का यही दिलचस्प पहलू है… यहाँ हर भाषण के बाद नई बहस जन्म लेती है।

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