
दिल्ली की हल्की गर्म दोपहर में संसद भवन के बाहर अचानक एक अजीब दृश्य दिखा। नेताओं के हाथों में पोस्टर नहीं, गैस सिलेंडर की आकृति वाली तख्तियां थीं। नारे गूंज रहे थे। कैमरे चमक रहे थे। और सियासत अपने पुराने अंदाज़ में एक नए मुद्दे को पकड़ चुकी थी।
ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से देश में गहराते LPG संकट को लेकर विपक्षी दल गुरुवार को संसद के बाहर उतर आए। और राजनीति की इस रंगमंचीय प्रस्तुति में सबसे तीखा संवाद आया Rahul Gandhi की ओर से।
संसद के बाहर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
संसद के मकर द्वार के पास Indian National Congress, Samajwadi Party, और Dravida Munnetra Kazhagam सहित कई दलों के सांसद इकट्ठा हुए। नारे लगे, पोस्टर उठे और सरकार पर आरोपों की झड़ी लग गई।
विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध ने भारत की LPG सप्लाई चेन को झटका दिया है और आम लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
राहुल गांधी का सियासी तंज
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा “संसद से नरेंद्र गायब, देश से सिलेंडर गायब।”
यह सीधा तंज था प्रधानमंत्री Narendra Modi पर। मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री लोगों से कह रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन खुद अलग कारणों से घबराए हुए दिखाई देते हैं।
उनका दावा था कि सरकार संसद में सवालों का सामना करने से बच रही है।
‘सिलेंडर प्रॉप’ के साथ सियासत
प्रदर्शन में सबसे दिलचस्प दृश्य था सिलेंडर के आकार वाले पोस्टर। राजनीति में प्रतीकों की ताकत बहुत पुरानी है। कभी प्याज चुनाव जिताती है, कभी पेट्रोल पंप की तस्वीरें सुर्खियां बनाती हैं। इस बार विपक्ष ने LPG सिलेंडर को सियासी हथियार बना दिया।

संदेश साफ था “रसोई का संकट सिर्फ घरेलू नहीं, अब राजनीतिक भी है।”
सरकार का जवाब: घबराने की जरूरत नहीं
इस पूरे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देशवासियों से अपील की थी कि वे घबराएं नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जनहित की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों से बचें।
असली कहानी: युद्ध और ऊर्जा की राजनीति
दरअसल इस पूरे विवाद की जड़ पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव है। Middle East में चल रहा संघर्ष सिर्फ सैन्य खबर नहीं है। इसका असर तेल, गैस और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में जरा सा तनाव भी देश की रसोई से लेकर संसद तक बहस छेड़ देता है।
भारतीय राजनीति का एक पुराना नियम है जब भी जनता की रसोई पर असर पड़ता है, संसद का तापमान अपने आप बढ़ जाता है।
आज गैस सिलेंडर सिर्फ खाना पकाने का जरिया नहीं रहा। यह सियासी बहस का प्रेशर कुकर बन चुका है। और दिल्ली की राजनीति में यह कुकर अभी और सीटी मारने वाला है।
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