
लखनऊ की सियासत अब पुराने गलियारों से निकलकर एक नए, विशाल और हाईटेक परिसर में जाने की तैयारी कर रही है. गोमतीनगर के सहारा शहर में जल्द ही एक ऐसी विधानसभा बनने वाली है जो सिर्फ इमारत नहीं होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति का नया पावर-सर्किट बनेगी.
2030 तक तैयार होने वाली इस नई विधानसभा में लगभग 700 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी. यानी मौजूदा 403 सीटों वाली विधानसभा अब भविष्य की राजनीतिक भीड़ के सामने छोटी पड़ने वाली है.
राजनीति में भीड़ बढ़ रही है, कुर्सियां भी बढ़ानी पड़ेंगी. सत्ता का यह विस्तार अब नक्शे से निकलकर जमीन पर उतरने वाला है.
परिसीमन के बाद बढ़ेगी विधायकों की संख्या
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2029 का परिसीमन एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है. अनुमान है कि इसके बाद विधानसभा में 403 की जगह करीब 600 विधायक हो सकते हैं.
अभी हालात यह हैं कि जब संयुक्त सदन की बैठक होती है तो विधान परिषद के लगभग 100 सदस्यों को अस्थायी कुर्सियों पर बैठाना पड़ता है. सत्ता के गलियारों में यह दृश्य किसी “ओवरबुक्ड ट्रेन कोच” जैसा लगता है.
यही वजह है कि नई विधानसभा का विचार अब जरूरत बन चुका है. राजनीतिक गणित साफ है. सीटें बढ़ेंगी तो इमारत भी बड़ी चाहिए.
गोमतीनगर में बनेगा 280 एकड़ का विशाल परिसर
लखनऊ विकास प्राधिकरण की योजना के मुताबिक नई विधानसभा गोमतीनगर के सहारा शहर क्षेत्र में बनेगी. पूरा परिसर करीब 245 से 280 एकड़ जमीन पर फैलेगा.
इसके पीछे एक खूबसूरत बायोडायवर्सिटी पार्क और वेटलैंड भी बनाया जाएगा. यानी सत्ता के इस महल के पीछे प्रकृति का भी बैकड्रॉप होगा. राजनीति और पर्यावरण का यह अनोखा कॉम्बिनेशन लखनऊ को एक नई पहचान देने वाला है.

अगर योजना वैसी ही लागू हुई जैसी फाइलों में दिख रही है, तो यह परिसर सिर्फ विधानसभा नहीं बल्कि एक पॉलिटिकल लैंडमार्क बन जाएगा.
हाईटेक सुविधाओं से लैस होगी नई विधानसभा
नई विधानसभा सिर्फ बड़ी नहीं होगी, बल्कि पूरी तरह आधुनिक भी होगी. इसमें शामिल होंगी लगभग 700 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था। मंत्रियों के लिए अलग चैंबर। विशाल पार्किंग। ग्रीन बेल्ट और ओपन स्पेस। भविष्य में विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन।
यानी आने वाले दशकों की राजनीति को ध्यान में रखकर इस परिसर का डिजाइन तैयार किया जाएगा.
बजट पास, अब डिजाइन की तैयारी
राज्य सरकार ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए 2026-27 के बजट में 100 करोड़ रुपये की पहली किस्त मंजूर कर दी है. राज्य के वित्त मंत्री Suresh Kumar Khanna के अनुसार इस बजट के साथ निर्माण प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत हो सकती है. वहीं Lucknow Development Authority ने कंसल्टेंट चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्राधिकरण के उपाध्यक्ष Prathamesh Kumar के मुताबिक कंसल्टेंट के चयन के बाद डिजाइन और DPR को अंतिम रूप दिया जाएगा.
2030 तक बदल जाएगी सत्ता की तस्वीर
अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला तो 2030 तक नई विधानसभा तैयार हो जाएगी. तब लखनऊ में एक ऐसा पॉलिटिकल कॉम्प्लेक्स होगा जो आकार और सुविधाओं के मामले में देश की सबसे आधुनिक विधानसभाओं में गिना जाएगा.
सीधे शब्दों में कहें तो लखनऊ की राजनीति अब पुरानी इमारत से निकलकर नए पावर कॉरिडोर में शिफ्ट होने जा रही है. और शायद यही वह जगह होगी जहां आने वाले दशकों के बड़े फैसले लिखे जाएंगे.
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