आगरा से जासूसी का जाल: नौसेना का जवान निकला ISI का पंटर

अजमल शाह
अजमल शाह

देश की सुरक्षा सिर्फ सीमा पर तैनात सैनिकों से ही नहीं, बल्कि भरोसे की उस अदृश्य दीवार से भी चलती है जो वर्दी और राष्ट्र के बीच खड़ी होती है. लेकिन आगरा से सामने आया एक मामला इस भरोसे को झकझोर देने वाला है.

ताजनगरी से जुड़े एक नौसेना जवान पर आरोप है कि उसने वही वर्दी पहनकर दुश्मन की तरफ हाथ बढ़ाया. संयुक्त ऑपरेशन में Uttar Pradesh Special Task Force और सैन्य खुफिया एजेंसी ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जिस पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence से संपर्क रखने का आरोप है.

संयुक्त ऑपरेशन में हुआ बड़ा खुलासा

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक गिरफ्तार व्यक्ति भारतीय नौसेना का लांस नायक है और मूल रूप से Agra का रहने वाला है.

बताया जा रहा है कि वह केरल में तैनात था, लेकिन उसकी डिजिटल गतिविधियों ने जांच एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. काफी समय से सैन्य खुफिया एजेंसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी. जब डिजिटल ट्रेल एक खास प्रोफाइल तक पहुंचा, तब ऑपरेशन को आगे बढ़ाने के लिए यूपी STF को शामिल किया गया.

सोशल मीडिया बना जासूसी का रास्ता

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर पाकिस्तान के एजेंटों के संपर्क में था. आरोप है कि उसने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नौसैनिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा की. सूत्रों के मुताबिक इन जानकारियों में भारतीय युद्धपोतों की गतिविधियां और सैन्य तैनाती से जुड़े कुछ संवेदनशील इनपुट भी शामिल हो सकते हैं.

हालांकि जांच एजेंसियां अभी यह पता लगाने में जुटी हैं कि कितनी जानकारी वास्तव में साझा की गई.

डिजिटल सबूतों की फोरेंसिक जांच

गिरफ्तारी के बाद आरोपी के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए हैं. इन डिवाइस को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि डेटा ट्रांसफर किस स्तर तक हुआ. सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि क्या इस मामले में किसी संगठित जासूसी नेटवर्क का हाथ है.

बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन

जांच का एक और अहम पहलू आरोपी के बैंक खाते से जुड़ा है. प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्ध ट्रांजैक्शन के संकेत मिले हैं. एजेंसियों को शक है कि संवेदनशील जानकारी साझा करने के बदले उसे आर्थिक लाभ मिला हो सकता है. इसी कड़ी में वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच शुरू कर दी गई है.

नेटवर्क की तलाश में एजेंसियां

फिलहाल आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपी के खिलाफ Official Secrets Act के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है. अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों की श्रेणी में आएगा.

सुरक्षा तंत्र के लिए चेतावनी

यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है. यह उस जटिल डिजिटल जासूसी नेटवर्क की झलक भी देता है जो सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक जासूसी अब सीमा पार घुसपैठ से नहीं बल्कि मोबाइल स्क्रीन और एन्क्रिप्टेड चैट से शुरू होती है. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां अब साइबर निगरानी को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर रही हैं.

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