
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब सिर्फ मिसाइलों और ड्रोन की लड़ाई नहीं रह गई है। इसके पीछे राजनीतिक और सैन्य रणनीति का गहरा खेल सामने आ रहा है। इजरायल के रक्षा मंत्री ने Israel काट्ज़ ने दावा किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei को खत्म करने की योजना कई महीने पहले तैयार कर ली गई थी।
यह प्लान Benjamin Netanyahu ने खुद तैयार कराया था और इसके बारे में अमेरिका को भी जानकारी दी गई थी।
नवंबर 2025 की सीक्रेट मीटिंग
नवंबर 2025 में इजरायल के रक्षा मंत्रालय में एक सीक्रेट हाई-लेवल मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अधिकारियों के सामने एक प्रेजेंटेशन दिया। उसमें साफ कहा गया कि ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए खामेनेई को खत्म करना ही असली लक्ष्य है। यही प्लान बाद में अमेरिका को भी बताया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को भी इस ऑपरेशन की जानकारी दी गई थी।
जनवरी 2026 में होना था हमला
इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने 5 मार्च 2026 को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि असल में यह हमला जनवरी 2026 में ही होना था।लेकिन उस समय ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। स्थिति अस्थिर होने के कारण ऑपरेशन को टाल दिया गया।
इसी दौरान अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत भी चल रही थी, इसलिए वॉशिंगटन ने तीसरी मीटिंग तक इंतजार करने की सलाह दी।

बातचीत फेल… और फिर शुरू हुआ हमला
जब तीसरी कूटनीतिक मीटिंग नाकाम हो गई, तब इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ऑपरेशन को आगे बढ़ाया। पहले इजरायली सेना ने शुरुआती हमला किया, उसके बाद अमेरिकी सैन्य सिस्टम ने खामेनेई के संभावित ठिकाने को टारगेट किया। हमले से पहले कई दिनों तक रेकी और लोकेशन ट्रैकिंग भी की गई थी।
खामेनेई क्यों बने सबसे बड़ा टारगेट?
इजरायल लंबे समय से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए बड़ा खतरा मानता रहा है। तेल अवीव का मानना है कि जब तक ईरान की रणनीतिक कमान कमजोर नहीं होगी, तब तक खतरा खत्म नहीं होगा। इसी वजह से इजरायल की रणनीति में
“सिस्टम के सबसे ऊपर बैठे फैसले लेने वाले नेता” को निशाना बनाने की चर्चा सामने आई।
एक हमले से भड़क गया पूरा क्षेत्र
इस घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ गया। ईरान और इजरायल के बीच टकराव अब क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले चुका है। यह सिर्फ दो देशों का विवाद नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला संकट बन गया है।
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