NCERT की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

देश की शीर्ष शैक्षणिक संस्था राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से एक अंश शामिल किया।

जैसे ही यह सामग्री सार्वजनिक चर्चा में आई, मामला सीधे देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India तक पहुंच गया।

CJI सूर्य कांत की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक व्यक्ति या पाठ्यपुस्तक का मामला नहीं, बल्कि पूरी संस्था से जुड़ा प्रश्न है बार और बेंच दोनों से।

CJI ने कहा, “मुझे इसकी पूरी जानकारी है। मैं स्वतः संज्ञान ले रहा हूं। किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

वरिष्ठ वकीलों की आपत्ति

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंहवी ने पीठ के समक्ष मामला उठाया। उनका तर्क था कि बच्चों को इस तरह पढ़ाया जा रहा है, मानो भ्रष्टाचार केवल न्यायपालिका में ही मौजूद हो। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य संस्थाओं नौकरशाही, राजनीति का उल्लेख क्यों नहीं?

यदि शिक्षा संतुलित नहीं होगी, तो धारणा भी एकतरफा बनेगी।

शिक्षा या नैरेटिव?

यह विवाद केवल एक अध्याय का नहीं है, बल्कि उस व्यापक बहस का हिस्सा है जहां पाठ्यक्रम और सार्वजनिक संस्थाओं की छवि आमने-सामने खड़ी दिखती है। एक ओर पारदर्शिता और आलोचनात्मक सोच की बात है, दूसरी ओर संस्थागत गरिमा की रक्षा का सवाल।

अगर बच्चे सवाल पूछेंगे तो क्या वह लोकतंत्र की मजबूती है, या संस्थाओं की कमजोरी?

CJI ने संकेत दिया है कि अदालत इस विषय पर उचित कार्रवाई करेगी।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या NCERT से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा? क्या विवादित अंश में संशोधन होगा? या यह मामला व्यापक शैक्षिक नीति की समीक्षा तक पहुंचेगा?

फिलहाल, किताब का एक अध्याय राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है।

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