माघ मेला विवाद: पूर्व CBI डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की शंकराचार्य से सीक्रेट मीटिंग

राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

पूर्व सीबीआई डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव मंगलवार को वाराणसी स्थित श्री विद्या मठ पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से हुई।

करीब 25 मिनट तक चली यह बंद कमरे की बातचीत शुरुआत में गुरु-शिष्य भेंट बताई गई, लेकिन बाद में साफ हुआ कि मामला इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। नागेश्वर राव इन दिनों एक सिविल सोसाइटी ग्रुप का नेतृत्व कर रहे हैं, जो प्रयागराज के माघ मेला विवाद की स्वतंत्र जांच कर रहा है।

माघ मेला विवाद: पालकी यात्रा क्यों रोकी गई?

18 जनवरी 2026, मौनी अमावस्या के दिन हुए घटनाक्रम ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। परंपरागत पालकी यात्रा को रोकने का फैसला आखिर किन परिस्थितियों में लिया गया?

जांच टीम पुलिस और प्रशासन की भूमिका की समीक्षा कर रही है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि आदेश किसने दिया असली मुद्दा यह है कि धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच संतुलन क्यों बिगड़ा?

भारत में ट्रैफिक कभी-कभी आस्था को भी ‘डायवर्ट’ कर देता है!

प्रशासन से मांगे गए दस्तावेज

जानकारी के मुताबिक टीम ने पालकी यात्रा की अनुमति से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज, जारी नोटिस और संबंधित आदेशों की प्रतियां मांगी हैं।यह जांच केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी। मौके पर मौजूद पत्रकारों, पुलिसकर्मियों और चश्मदीदों से सीधे संवाद की तैयारी है। पूर्व नौकरशाहों और वरिष्ठ पत्रकारों की यह टीम तथ्यों को क्रॉस-वेरिफाई कर रही है ताकि रिपोर्ट संतुलित और विश्वसनीय हो।

एफआईआर और गंभीर आरोपों की भी जांच

सूत्रों के अनुसार, यह सिविल सोसाइटी संस्था हाल ही में दर्ज हुई एफआईआर और यौन शोषण के आरोपों के पहलू को भी गंभीरता से परख रही है।

एम. नागेश्वर राव जैसे अनुभवी जांच अधिकारी का जुड़ना इस प्रक्रिया को विश्वसनीयता देता है। लक्ष्य है एक ऐसी सार्वजनिक रिपोर्ट तैयार करना, जो न केवल प्रशासनिक कार्रवाई बल्कि पूरे घटनाक्रम की परतें खोले।

धर्म, प्रशासन और जवाबदेही

माघ मेला जैसे विशाल आयोजन में प्रशासनिक फैसले अक्सर सेकंडों में लिए जाते हैं, लेकिन उनके प्रभाव लंबे समय तक चर्चा में रहते हैं। यह मामला सिर्फ एक पालकी यात्रा का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो जनता प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं दोनों पर करती है।

अगर रिपोर्ट पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित हुई, तो यह भविष्य में ऐसे विवादों से निपटने का मॉडल बन सकती है।

जांच रिपोर्ट कब सार्वजनिक होगी? प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में क्या खामियां उजागर होंगी? धार्मिक आयोजनों में SOP का नया फ्रेमवर्क बनेगा?

Related posts

Leave a Comment