
प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी। सबसे ज्यादा चर्चा ‘Kerala’ का नाम बदलकर ‘Keralam’ करने के प्रस्ताव की रही, जिसे केंद्र ने मंजूरी दे दी है। लेकिन कहानी सिर्फ नाम तक सीमित नहीं है सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार देने के लिए ₹12,236 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को भी green signal दिया है। यानी headlines में symbolism, और फाइलों में steel & concrete!
₹12,236 करोड़ का Infra Push: Rail, Air, Metro
सरकार ने रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए तीन बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है:
- गोंदिया–जबलपुर डबलिंग: ₹5,236 करोड़
- पुनारख–किऊल तीसरी-चौथी लाइन: ₹2,668 करोड़
- गम्हरिया–चांदिल तीसरी-चौथी लाइन: ₹1,168 करोड़
इन परियोजनाओं का उद्देश्य freight movement को smooth बनाना और passenger traffic का दबाव कम करना है। इसके अलावा श्रीनगर में नए integrated airport terminal के लिए ₹1,667 करोड़ की मंजूरी दी गई है, जबकि अहमदाबाद Metro Phase 2B के विस्तार के लिए ₹1,067 करोड़ का प्रावधान हुआ है।
सरकार का दावा है कि इससे logistics cost कम होगी और regional connectivity बेहतर होगी।
Agriculture & Power Sector Boost
कैबिनेट ने जूट किसानों को राहत देते हुए ₹430 करोड़ के आवंटन के साथ MSP तय किया है। साथ ही बिजली क्षेत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए भी नीतिगत फैसले लिए गए हैं। मतलब, एक तरफ infra corridors, दूसरी तरफ खेत-खलिहान political optics और economic arithmetic का interesting mix।
सबसे ज्यादा चर्चा: ‘Kerala’ से ‘Keralam’
राज्य विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव को अब केंद्र की स्वीकृति मिल गई है। हालांकि अंतिम फैसला संसद की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।संवैधानिक रूप से यह प्रक्रिया भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 के तहत होती है। राज्य विधानसभा प्रस्ताव भेजती है, राष्ट्रपति की सिफारिश के बाद संसद में विधेयक आता है और साधारण बहुमत से पारित होने पर संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाता है।

ध्यान देने वाली बात इसके लिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद 368 के तहत विशेष संशोधन की जरूरत नहीं होती। यानी प्रक्रिया राजनीतिक है, लेकिन तकनीकी तौर पर सीधी।
Political Timing?
अप्रैल–मई 2026 में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले यह फैसला राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा रहा है। समर्थकों के लिए यह “cultural identity correction” है, तो आलोचकों के लिए “symbolism over substance”। सवाल यही है क्या voters के लिए नाम ज्यादा मायने रखेगा या नौकरियां और नेटवर्क?
“Board बदले या Budget, जनता का सवाल वही — फायदा किसे?”
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