दुश्मन बाद में, पहले फ्लश! USS Ford पर ‘टॉयलेट वार’ से हिली सुपरपावर

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

दुनिया का सबसे महंगा और हाईटेक विमानवाहक युद्धपोत USS Gerald R Ford इन दिनों मिसाइलों से नहीं, बल्कि मल्टी-मिलियन डॉलर वाले मैकेनिकल फ्लश सिस्टम से जूझ रहा है। ईरान पर संभावित कार्रवाई की तैयारी के बीच यह जहाज Middle East की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अंदर की हालत ऐसी है कि 4000 से ज्यादा sailors basic sanitation के लिए लाइन में खड़े हैं।

$13 Billion का सुपरशिप, मगर सिस्टम डाउन

करीब 13 अरब डॉलर की लागत से बना यह aircraft carrier अमेरिकी नौसेना की टेक्नोलॉजिकल शान माना जाता है। इसमें लगाया गया advanced vacuum sewage system कम पानी में सफाई के लिए डिजाइन किया गया था।
लेकिन irony देखिए, यही futuristic system अब जहाज की सबसे बड़ी कमजोरी बन चुका है।

रिपोर्ट्स के अनुसार कई बार 90% तक toilets काम करना बंद कर देते हैं। Sailors को 45 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। Engineering टीम 19-19 घंटे की शिफ्ट कर रही है, मगर समस्या जिद्दी मेहमान की तरह टस से मस नहीं हो रही।

Health और Morale पर असर

लंबी कतारें, बदबू और असुविधा का असर अब sailors की health और mental state पर दिखने लगा है। War readiness सिर्फ हथियारों से नहीं, human condition से भी तय होती है। अगर crew ही परेशान हो, तो billion-dollar technology भी confidence नहीं दे पाती।

Iran Tension के बीच उठते सवाल

ट्रंप प्रशासन की ईरान को लेकर कड़ी बयानबाजी के बीच यह toilet crisis US Navy की preparedness पर सवाल खड़े कर रहा है। जो जहाज theoretically एक देश की सैन्य क्षमता को चुनौती दे सकता है, वही अपने crew को basic सुविधा देने में संघर्ष कर रहा है।

यह घटना एक subtle reminder है कि modern warfare सिर्फ missiles और radar से नहीं जीतते। Infrastructure की छोटी सी गड़बड़ी भी global power narrative को हिला सकती है।

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