“चार दिन तलाश, छह घंटे में बेल! कानपुर लेम्बोर्गिनी केस ने उठाए कई सवाल”

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

कानपुर में कथित हिट-एंड-रन मामले ने गुरुवार को नया मोड़ ले लिया, जब तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद जमानत मिल गई।

24 वर्षीय मिश्रा पर आरोप है कि उनकी लेम्बोर्गिनी कार ने वीआईपी रोड पर फुटपाथ पर चल रहे लोगों और वाहनों को टक्कर मारी। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्हें 20,000 रुपये के निजी मुचलके पर राहत दे दी।

Court Observation: Procedure Matters

पुलिस ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड की मांग की थी। लेकिन अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(3) के तहत आवश्यक नोटिस की विधिवत तामील नहीं की गई। कोर्ट ने साफ किया उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना गिरफ्तारी वैध नहीं मानी जा सकती।

यही आधार जमानत का प्रमुख कारण बना।

FIR से Courtroom तक

हादसा: रविवार दोपहर करीब 3 बजे, गिरफ्तारी: गुरुवार सुबह, जमानत: उसी दिन कुछ घंटों के भीतर। पुलिस का दावा था कि शिवम जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। वहीं कोर्ट रिकॉर्ड की जांच में प्रक्रियात्मक कमियां सामने आईं।

Case Takes a Twist

मामले में नया मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता मोहम्मद तौफीक ने कोर्ट में समझौते की अर्जी दी और कहा कि हादसे के समय कार शिवम नहीं, बल्कि एक ड्राइवर चला रहा था। मोहन नाम के व्यक्ति ने भी ड्राइविंग की जिम्मेदारी ली। हालांकि पुलिस रिपोर्ट में मोहन का उल्लेख नहीं कोर्ट ने उसके सरेंडर को स्वीकार नहीं किया।

इस बीच पुलिस ने CCTV फुटेज और चश्मदीदों के बयान का हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया कि हादसे के बाद शिवम को ड्राइवर सीट से बाहर निकाला गया।

Bail Conditions: Free but Not Fully Free

अदालत ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी लगाईं- जांच में पूरा सहयोग। जरूरत पड़ने पर कोर्ट में पेशी। गवाहों को प्रभावित न करना। सबूतों से छेड़छाड़ न करना।

यानी कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

यह मामला अब दो स्तरों पर चर्चा में है क्या आरोपी वास्तव में ड्राइव कर रहा था? क्या पुलिस ने प्रक्रिया का पालन किया? कानून में प्रक्रिया उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना अपराध का आरोप।

हादसा, हाई-प्रोफाइल कार, वायरल वीडियो… और फिर कोर्टरूम ड्रामा। कानपुर का यह केस बताता है कि कभी-कभी “स्पीड” सिर्फ सड़क पर नहीं, कानूनी घटनाक्रम में भी दिखती है।

जांच जारी है। CCTV, फॉरेंसिक और गवाहों के बयानों की भूमिका अहम रहेगी। यह मामला सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया और जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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