
भारत और अमेरिका के बीच महीनों से चल रहा tariff war और oil diplomacy अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़ों में भी दिखने लगा है।
FY 2025 के शुरुआती 8 महीनों में भारत ने अमेरिका से crude oil imports में 92% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की है—वो भी ऐसे समय में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत पर Russia से तेल खरीद रोकने का दबाव बना रहे थे।
Russia से दूरी या मजबूरी? डेटा में छुपा सियासी गणित
दूसरी ओर, October 2025 में Russia से तेल आयात में 38% (value) और 31% (volume) की तेज गिरावट दर्ज हुई—जो अब तक की सबसे बड़ी monthly fall मानी जा रही है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
Ground reality ये है कि Russia से मिलने वाला crude अब भी सस्ता है, इसलिए percentage गिरावट के बावजूद India ने 2025 में Russian oil import पूरी तरह बंद नहीं किया।
November डेटा: असली खेल यहीं है
- Russia से आयात (Nov 2025): 7.7 million tonnes
- Russia (Nov 2024): 7.2 million tonnes → 6.8% increase
- US से आयात (Nov 2024): 1.1 million tonnes
- US से आयात (Nov 2025): 2.8 million tonnes → 144% jump
यानि America percentage game जीत रहा है, लेकिन volume का king अब भी Russia है।
Sanctions, Strategy और Trump की Politics
November 2025 में Rosneft और Lukoil पर US sanctions के बाद December से Russia के exports में गिरावट दिखने लगी।
Trump इसे अपनी foreign policy victory बता रहे हैं, लेकिन असली तस्वीर तभी साफ होगी जब December 2025 के official आंकड़े सामने आएंगे।

भारत ने न तो रूस को छोड़ा, न अमेरिका को नाराज़ किया। एक तरफ ट्रंप को दिखाया—“Look, we are buying more US oil” और दूसरी तरफ रूस से सस्ता crude लेकर बताया—“Economy first, optics later.”
यही है New India की multi-alignment oil diplomacy—जहां भावनाएं नहीं, बैरल बोलते हैं।
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