
झारखंड के धनबाद में एक बार फिर कोयला खदानों की खामोश आग ने लोगों की जान पर बन आई। PB एरिया की खदान से कार्बन-मोनो-ऑक्साइड गैस इस तरह निकली जैसे सोमवार की सुबह ऑफिस rush हो – बिना रोक-टोक, बिना कंट्रोल।
इस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 50 लोगों को अस्पताल में एडमिट कराया गया है। अच्छी खबर ये कि डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत अब खतरे से बाहर है।
लेकिन असली चिंता है उन 10,000 लोगों की, जिन पर गैस लीक का असर पड़ा।
1,000 लोग छोड़ गए घर – “जान बची तो लाखों पाए” मोड ON
जिस इलाके में रिसाव हुआ, वहां रहने वाले करीब 1,000 लोग अपना घर छोड़कर भाग निकले।
कारण?
सरकार और BCCL ने कहा— “इलाका खाली कर दो… बाकी बाद में देखा जाएगा।”
दीवारों पर नोटिस चिपका दिए गए, लोग अपना सामान लेकर जैसे-तैसे सुरक्षित जगह पहुंचे।
क्या हुआ था असल में? खदानों में CO गैस का पुराना इतिहास
धनबाद के केंदुआडीह बस्ती में कई खदानें ऐसी हैं जहां CO गैस का रिसाव कोई नया मेहमान नहीं। अक्सर आती रहती है… बिना बुलाए।

इस बार एक खदान में रिसाव इतना बड़ा हुआ कि लोग उल्टियां, सांस फूलना और चक्कर जैसी समस्या से परेशान हो गए। जिला प्रशासन और BCCL ने तुरंत इलाके को खाली कराया।
BCCL का बयान: “जांच चल रही है… मुआवजा भी मिलेगा”
BCCL के GM जीसी साहा ने कहा, खदान को खाली कराया गया, इलाके को भी सील किया गया, अस्पतालों में एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें तैनात। भर्ती लोगों के इलाज का खर्च कंपनी देगी। मुआवजा भी दिलाया जाएगा। सरकारी विभागों ने भी तेजी दिखाने की एक्टिंग नहीं, बल्कि वास्तविक फुर्ती दिखाई (काफी समय बाद)।
सवाल वही पुराने: खदानें कब होंगी सुरक्षित?
धनबाद में CO गैस का रिसाव कोई पहली बार नहीं हुआ। स्थानीय लोग कहते हैं— “यहां खदानें कम, टाइम बम ज्यादा हैं।”
हर बड़े हादसे के बाद जांच होती है, रिपोर्ट आती है, और फिर… सब वैसा का वैसा। इस बार फिर वही सवाल – “जिम्मेदारी किसकी?”
“सुरक्षा कब तक सिर्फ कागज़ पर रहेगी?”
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