
उत्तराखंड और हिमाचल के बाद अब जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले से बादल फटने की खबर सामने आई है।
गुरुवार दोपहर को किश्तवाड़ के पड्डर के चिशोती गांव, जो कि मचैल माता मंदिर यात्रा का आरंभिक बिंदु है, वहां भारी बादल फटा, जिससे अचानक बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
श्रद्धालुओं में चीख-पुकार, राहत-बचाव कार्य शुरू
बादल फटने के वक्त बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। अचानक आई बाढ़ के कारण कई श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग अपनों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान की ओर भाग रहे हैं।
एक वीडियो में एक कार बाढ़ में फंसी नजर आई, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने लिया फौरन एक्शन
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घटना की जानकारी मिलते ही किश्तवाड़ के डीसी पंकज शर्मा से संपर्क किया और स्थिति की रिपोर्ट मांगी।
उन्होंने बताया कि बचाव दल रवाना कर दिया गया है और हर संभव मेडिकल और राहत सुविधा जुटाई जा रही है।
मौसम विभाग ने पहले ही जताई थी आशंका
श्रीनगर मौसम केंद्र ने पहले ही अगले 6 घंटों के लिए तेज बारिश और बादल फटने की संभावना जताई थी। किश्तवाड़, काजीगुंड, बनिहाल और रामबन के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड्स की चेतावनी दी गई थी।
एहतियातन डल झील, वुलर झील समेत कई जलाशयों में गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जताया दुख
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस घटना पर दुख जताते हुए प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सिविल प्रशासन, पुलिस, सेना, NDRF और SDRF को तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के आदेश दिए।
“शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं” – मनोज सिन्हा
बढ़ते मॉनसून के बीच बादल फटना अब हिमालयी राज्यों के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहा है। किश्तवाड़ की घटना इस बात का संकेत है कि प्राकृतिक आपदाओं को लेकर तैयारियों को और मज़बूत करने की जरूरत है।
राहत-बचाव टीमों की मुस्तैदी और श्रद्धालुओं की हिम्मत ने अब तक बड़ी त्रासदी को टाल दिया है, लेकिन स्थिति पर कड़ी नजर बनी हुई है।
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