बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में मशरूम उत्पादन पर एकदिवसीय प्रशिक्षण, 400 से अधिक विद्यार्थियों ने सीखी वैज्ञानिक तकनीकें
सेवा संकल्प अभियान के तहत कृषि उद्यमिता, कौशल विकास और आय के वैकल्पिक स्रोतों पर हुआ मंथ।
झांसी।बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा शनिवार को सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गांधी सभागार में मशरूम उत्पादन पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 400 से अधिक बीएससी कृषि, एमएससी कृषि एवं शोध विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विशेषज्ञों ने मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों, प्रबंधन, विपणन और व्यवसाय की संभावनाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि शिक्षा को व्यावहारिक कौशल से जोड़ते हुए युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. विपिन बिहारी द्विवेदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता की व्यापक संभावनाएं हैं। युवाओं को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों और कृषि आधारित व्यवसायों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन जैसे उद्यम कम संसाधनों में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। इसके लिए वैज्ञानिक जानकारी, प्रशिक्षण और बेहतर प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से कृषि शिक्षा के दौरान अर्जित ज्ञान को व्यावहारिक रूप देकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि जिला कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने कहा कि कृषि विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बदलते समय में खेती के साथ मशरूम उत्पादन, जैविक कृषि और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को नई तकनीकें सीखने, नवाचार करने और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध स्वरोजगार की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य वक्ता एवं मनुप्रा के संस्थापक प्रवीण वर्मा ने मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक विधियों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधनों, उपयुक्त वातावरण, उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रबंधन और विपणन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन सीमित स्थान में शुरू किया जा सकने वाला व्यवसाय है। इसकी सफलता के लिए उत्पादन की वैज्ञानिक जानकारी के साथ बाजार की मांग और उत्पाद की गुणवत्ता को समझना भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को मशरूम उत्पादन को व्यावसायिक रूप देकर स्वयं का उद्यम स्थापित करने की संभावनाओं से परिचित कराया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. विनीत कुमार ने कहा कि कृषि शिक्षा की सार्थकता तभी है, जब विद्यार्थी सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता भी हासिल करें। उन्होंने मशरूम को प्रोटीन का उपयोगी स्रोत बताते हुए कहा कि पौष्टिक आहार के साथ व्यावसायिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नए अवसर तलाशने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए आयोजक डॉ. सत्यबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय के नेतृत्व में विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
कृषि विज्ञान संस्थान के समन्वयक डॉ. संतोष कुमार पांडेय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के किसानों के लिए पारंपरिक खेती के अतिरिक्त आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना आवश्यक है। मशरूम उत्पादन, जैविक कृषि और कृषि आधारित लघु उद्यम किसानों तथा युवाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने कृषि विद्यार्थियों के लिए कौशल आधारित प्रशिक्षण को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम में डॉ. शिशिर कुमार सिंह, डॉ. अरविंद कुमार भारती, डॉ. महीपत सिंह यादव, डॉ. जितेंद्र कुमार बबेले, डॉ. पी.के. सिंह, डॉ. हरपाल सिंह, डॉ. अवनीश द्विवेदी, डॉ. जय नारायण तिवारी, डॉ. आस्था गुप्ता, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. अभिषेक कुमार चौधरी, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. नीतिराज, डॉ. मौसमी सैयद, डॉ. महजबी हाशमी, डॉ. अलका श्रीवास्तव, डॉ. आशीष कुमार तिवारी, डॉ. अनुराधा झा, डॉ. अजय सिंह, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. मनीष द्विवेदी, डॉ. अनिदुबा एवं डॉ. बुद्धेश प्रताप सिंह सहित संस्थान के शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
