
उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान उस वक्त हालात बिगड़ गए, जब चर्चा के बीच लगातार शोर-शराबा बढ़ता गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने गुस्से में अपना हेडफोन उतारकर फेंक दिया और कार्यवाही करीब 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
यह घटनाक्रम शुक्रवार को बजट चर्चा के दौरान सामने आया, जब सदन में लोक सेवा आयोग से जुड़ी भर्तियों पर सवाल-जवाब चल रहे थे।
क्यों हुआ हंगामा?
समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया। जवाब दे रहे थे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना। इसी बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायक एक साथ खड़े होकर अपनी बात रखने लगे। टोका-टोकी, नारों और आपसी बहस से माहौल असंतुलित होता गया।
बीजेपी विधायक केतकी सिंह भी बोलने के लिए खड़ी हो गईं। अध्यक्ष ने उन्हें नियमों का हवाला देते हुए बैठने को कहा, लेकिन शोर कम नहीं हुआ।
“क्या अब विधायक ही सदन चलाएंगे?”
अवस्था नियंत्रण से बाहर होती देख सतीश महाना ने सख्त लहजे में कहा — “क्या अब विधायक ही सदन चलाएंगे?” इसके बाद उन्होंने नाराजगी में हेडफोन फेंक दिया और सदन की कार्यवाही रोक दी। करीब 10 मिनट बाद जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो माहौल कुछ शांत नजर आया।

शायरी से हल्का हुआ माहौल
सदन दोबारा शुरू होने पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने शायरी के अंदाज में अपनी बात रखी। इससे माहौल थोड़ा हल्का हुआ और तनाव कम होता दिखा। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को “Budget Session Drama Moment” कहा जा रहा है।
यूपी विधानसभा में बजट कम, डेसिबल ज्यादा सुनाई दिए। Speaker का हेडफोन भी शायद सोच रहा होगा — “मुझे क्यों उतारा?” लेकिन लोकतंत्र की खूबसूरती यही है — बहस भी होगी, नाराजगी भी… और अंत में शायरी भी।
पॉलिटिकल मैसेज क्या है?
यह घटना बताती है कि चुनावी साल के बजट सत्र में हर मुद्दा संवेदनशील हो जाता है। भर्ती, रोजगार और बजट घोषणाएं विपक्ष और सत्ता पक्ष के लिए राजनीतिक हथियार बन जाती हैं। सदन का यह दृश्य इस बात का संकेत है कि आने वाले महीनों में यूपी की राजनीति और तेज हो सकती है।
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