सऊदी-तुर्किये-पाकिस्तान के रक्षा समझौते से खुश हुए ट्रंप, बोले- ‘शानदार फैसला’, बताया क्यों है अहम

वॉशिंगटन: सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वागत किया है। ट्रंप ने इस त्रिपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था को मध्य पूर्व में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। खास बात यह है कि अमेरिका की ओर से इस समझौते पर प्रतिक्रिया करीब 10 दिन बाद आई है। तुर्किये नाटो का सदस्य है, जबकि सऊदी अरब और पाकिस्तान अमेरिका के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि वह यह देखकर बहुत खुश हैं कि सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने आखिरकार इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता दिखाता है कि मध्य पूर्व के देश किस तरह एक साथ आ रहे हैं और अपनी सुरक्षा के लिए अधिक प्रभावी ढंग से सक्षम हो रहे हैं।

ट्रंप ने इस समझौते को एक बड़ा, साहसिक और महत्वपूर्ण पहला कदम बताया है।

7 अगस्त को हुआ था मक्का संयुक्त रक्षा समझौता

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए थे।

यह समझौता सैन्य और सुरक्षा सहयोग के साथ सामूहिक रक्षा व्यवस्था पर केंद्रित है। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

समझौते में सैन्य समन्वय बढ़ाने, संयुक्त सामरिक अभ्यास करने और रक्षा तकनीक तथा सैन्य औद्योगिक क्षमताओं में सहयोग बढ़ाने की रूपरेखा भी शामिल है।

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कूटनीतिक सहयोग पर जोर

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने ईरान तथा अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में सहयोग करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब मध्य पूर्व में क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बनी हुई हैं। हालांकि, समझौते में शामिल तीनों देशों ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति की है।

तीनों देशों के मुताबिक, इसका उद्देश्य किसी सैन्य या सांप्रदायिक गुट का गठन करना नहीं है, बल्कि आपसी सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।

आगे दूसरे देशों को भी मिल सकता है मौका

तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने संकेत दिया है कि भविष्य में इस व्यवस्था का विस्तार किया जा सकता है। उन्होंने मिस्र के भी इसमें शामिल होने की संभावना का उल्लेख किया है।

एर्दोगान के मुताबिक, आगे चलकर इस रक्षा व्यवस्था में अन्य देशों को भी शामिल किया जा सकता है। इससे यह समझौता भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के व्यापक ढांचे का रूप ले सकता है।

 

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