सियासत में टाइमिंग ही सब कुछ होती है… और संदीप पाठक की टाइमिंग ने पूरा खेल पलट दिया। कल तक जो आदमी रणनीति का मास्टर था, आज वो खुद सिस्टम के शिकंजे में फंसा दिख रहा है। और सवाल सिर्फ FIR का नहीं है… सवाल है कि ये ‘इत्तेफाक’ है या ‘इंजीनियरिंग’? दूसरा झटका और भी गहरा है। जिस शख्स ने पार्टी को खड़ा किया, उसी के कदम बदलते ही कानून अचानक जाग गया। क्या ये सिर्फ कानूनी कार्रवाई है… या सियासी शतरंज की अगली चाल? FIR का डबल अटैक: मामला…
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