मिडिल ईस्ट में गूंजते बमों की आवाज सिर्फ मिसाइलों की नहीं, बल्कि भू-राजनीति के पुराने खेल की भी लगती है। आधिकारिक बयान कहता है कि लक्ष्य परमाणु कार्यक्रम है, लोकतंत्र बहाली है लेकिन सवाल यह है कि अगर मकसद सिर्फ परमाणु ठिकाने होते तो रिहाइशी इलाकों तक धमाके क्यों पहुंचते? युद्ध के इस धुएं के पीछे एक और कहानी अक्सर फुसफुसाती है। उस कहानी का नाम है ऊर्जा, खनिज और रणनीतिक संसाधन। और इसी वजह से आज दुनिया की नजर Iran की जमीन के नीचे छिपे खजाने पर भी टिकी…
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ट्रम्प अंकल! ईरान कोई कराकस नहीं, यहां खेल अलग है
अंतरराष्ट्रीय राजनीति कभी भी Ctrl+C, Ctrl+V से नहीं चलती। लेकिन वॉशिंगटन की सोच में अक्सर यह भरोसा झलकता है कि जहां आर्थिक दबाव और सैन्य muscle ने काम किया, वहीं फार्मूला दोबारा चल जाएगा। Donald Trump का दृष्टिकोण स्पष्ट रहा है बाहरी दबाव बढ़ाओ, सैन्य ताकत दिखाओ, और विरोधी सत्ता खुद बिखर जाएगी। मगर सवाल है, क्या ईरान वही कहानी दोहराएगा जो Venezuela में देखने को मिली? संकेत साफ हैं नहीं। प्रॉक्सी नेटवर्क: ‘एक्सिस ऑफ रेज़िस्टेंस’ का जाल ईरान अकेला खिलाड़ी नहीं है। इराक से लेकर लेबनान और यमन तक उसका…
Read Moreईरान की नाकाबंदी से Global Oil Supply पर खतरा, भारत की बढ़ी टेंशन
Middle East में हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। ईरान ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री पट्टी हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को रेडियो मैसेज भेजकर चेतावनी दी जा रही है कि वे आगे न बढ़ें। यह वही संकीर्ण समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है चौड़ाई महज करीब 50 किलोमीटर। रणनीतिक रूप से देखें तो यह “Global Energy Artery” है। Global Energy Market के लिए क्यों बड़ा…
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